राजतंत्र के कारक ग्रह, सरकारी पद प्रतिष्ठा नौकरी के कारक ग्रह ग्रहों में राजा सूर्य का अपने मित्र ग्रह बुध की राशि कन्या से शुक्र की राशि तुला में गोचरीय परिवर्तन हो गया है। सूर्य की तीन स्थितियां अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं । पहली जब अपनी राशि सिंह में होते हैं । दूसरी जब ये अपनी उच्च राशि मेष में होते हैं । साथ ही जब ये अपनी नीच राशि तुला में होते है। क्योंकि जहां सिंह एवं मेष राशि में पूर्ण शुभ या अशुभ फल प्रदान कर पाने में समर्थ होते हैं । वही तुला राशि में अपना प्रभाव दे पाने में असमर्थ भी होते हैं।  

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स्वतंत्र भारत की कुंडली में सूर्य सुख भाव के कारक होकर छठे भाव में नीच राशि तुला में गोचर करने जा रहे हैं। सुखेश का छठे भाव में केतु के साथ गोचर करना सुख की दृष्टि से ठीक नहीं होता है । साथ ही राहु की दृष्टि भी सूर्य पर पड़ेगा। ऐसे में सूर्य के सकारात्मक प्रभाव में ज्यादा कमी देखी जाएगी। परिणाम स्वरूप भारत की जनता सुख में कमी महसूस कर सकती है । सरकारी तंत्र की कार्य योजनाएं अर्थात कार्यशैली आम जनमानस के लिए सुखद कम होगा।

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 सरकार चाहे केंद्रीय सरकार हो अर्थात राज्य सरकार इनके द्वारा भी कोई कठोर निर्णय लिया जा सकता है। जिसके कारण आम जनमानस को सुख में कमी महसूस हो सकता है। फिर भी अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर विचार किया जाए तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त होगा । पश्चिमी क्षेत्र तनाव पूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकता है । राष्ट्र के पश्चिमी क्षेत्र में सरकारी क्षेत्र से जुड़े अधिकारी अथवा बड़े व्यक्तित्व की क्षति या नुकसान इस अवधि में हो सकता है । इस प्रकार पुलिस बल से लेकर सरकारी तंत्र के जितने भी अधिकारी गण है । 

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विशेषकर सीबीआई सुरक्षा व्यवस्था जैसी एजेंसियां विशेष तौर पर सतर्क रहकर के कार्य करें तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त होगा। अब हम मेष से लेकर मीन लग्न पर्यंत के सभी लोगों पर किस प्रकार का प्रभाव स्थापित होगा । जब सूर्य अपनी नीच राशि तुला में गोचरीय संचरण करेंगे।

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मेष :- पंचमेश होकर सप्तम भाव में।

तेज में वृद्धि ।आक्रामकता में वृद्धि । झल्लाहट में वृद्धि के कारण दांपत्य जीवन अथवा प्रेम संबंध में अवरोध या तनाव उत्पन्न हो सकता है। अध्ययन अध्यापन के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय थोड़ा सा तनाव उत्पन्न कर सकता है । साझेदारी के कार्यों में अवरोध या तनाव उत्पन्न हो सकता है। संतान पक्ष से भी नकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकता है। पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिन्ता की स्थिति इस अवधि में बन सकता है ।क्रोध एवं झल्लाहट पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है

उपाय :- मूल कुंडली के अनुसार माणिक्य रत्न धारण कर सकते हैं।

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वृष  :- सुखेश होकर षष्ट भाव में। प्रतियोगिता में विजय । पुराने रोग एवं कर्ज से मुक्ति मिल सकता है । शत्रु पर विजय प्राप्त हो सकता है। दूरस्थ यात्रा का भी संयोग बन सकता है ।आंखों की समस्या तनाव उत्पन्न हो सकता है। सुख के संसाधनों को लेकर के तनाव या खर्च की स्थिति उत्पन्न हो सकता है। माता के स्वास्थ्य को लेकर या माता से मनमुटाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकता है। मन अशांत रहेगा । सुख की अनुभूति कम होगा।

उपाय :- सूर्य को नियमित जल देते रहें।

मिथुन :- पराक्रमेश होकर पंचम भाव में।  भाई, बंधुओं ,बहनों के पक्ष से कुछ नकारात्मक स्थिति जैसे स्वास्थ्य गत समस्या उत्पन्न हो सकता है । सामाजिक पक्ष में थोड़ा सा व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। संतान पक्ष से थोड़ी विवाद या तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकता है। आय एवं लाभ के संसाधनों में सकारात्मक वृद्धि का भी संयोग बनेगा। अध्ययन अध्यापन के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय थोड़ा सा नकारात्मक हो सकता है । पिता को चोट अथवा ऑपरेशन के प्रति सावधान रहना होगा।

उपाय :- पिता का आशीर्वाद लेकर ही कोई कार्य करें।

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सिंह :- लग्नेश होकर पराक्रम भाव में। 

पराक्रम में वृद्धि ।सम्मान में वृद्धि। सामाजिक पद प्रतिष्ठा में वृद्धि का संयोग बनेगा। अचानक मनोबल में कमी तथा नकारात्मक विचारों में वृद्धि । स्वास्थ्य के प्रति इस अवधि में विशेष तौर पर सतर्क रहें । चोट अथवा ऑपरेशन की भी स्थिति उत्पन्न हो सकता है। भाग्य का सकारात्मक साथ प्राप्त होगा। पिता के सुख सानिध्य में वृद्धि होगा। उपाय :- कुंडली के अनुसार माणिक्य रत्न धारण करें।