आज शनिवार का दिन है और आज अमावस्या है जिसे शनि अमावस्या (Shani Amavasya) के नाम से भी जाना जाता है। खास बात यह है कि आज के दिन ही सूर्य ग्रहण (solar eclipse) लगने वाला है। इस योग से गजबके संयोग बन रहे हैं। बताया जा रहा है कि शनि अमावस्या के दिन सूर्य और उसके पुत्र शनि का मिलन होता है।
अमावस्या का दुर्लभ योग में शनि (Shani) को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं जिनका प्रभाव अन्य दिनों की अपेक्षा कई गुना मिलता है। जिन व्यक्तियों पर शनि की महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती (Sade Sati) अथवा ढैय्या (Dhaiya) चल रही है और शनि अपनी इस अवस्था में किसी व्यक्ति को आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक अथवा राजनीतिक कष्ट पहुंचा रहे हों तो इन उपायों के जरिए शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं।
उपाय-
प्रातःकाल सूर्योदय होने से पहले पीपल के वृक्ष के नीचे जल में दूध, काले तिल और मीठा डालकर जल चढ़ाएं और ओम् शं शनैश्चराय नमः का जाप करते हुए 11 परिक्रमा करें।
प्रात:काल स्नान के जल में कुछ दाने काले तिल के डालें और स्नान करते हुए शनिदेव का ध्यान करें। ऐसा प्रत्येक शनिवार करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

शनि अमावस्या (Shani Amavasya) को एक लोहे की अथवा स्टील की कटोरी में तेल भरकर उसमें बिना गिने सिक्के डालें और परिवार के सभी सदस्य उसमें अपना चेहरा देखें। चेहरा देखने के बाद उसे किसी पडिया अथवा भिखारी को दान कर दें। इससे शारीरिक कष्ट की निवृक्ति होती है।
यदि कोई व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती अथवा महादशा में शारीरिक कष्ट पा रहा है तो शनि अमावस्या को उसके वजन के बराबर तुलादान (सतनजा) दान करें। ऐसा करने से शारीरिक कष्ट का निवारण होने लगता है।

शनि अमावस्या (Shani Amavasya) को शनि के तांत्रिक मंत्र ’ओम् प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नमः’ कम से कम 23 हजार अथवा 92 हजार जाप करने से शनि कृत कष्टों से मुक्ति मिलती है।