आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गए हैं। आज मां लोक से धरती पर पधार चुकी है।  अब वह 9 दिनों तक मां दुर्गा (Maa Durga) धरती पर ही वास करेंगी। इस दौरान मां के हर दिन कई रूप धरती पर आएंगे जिनकी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाएगी। नवरात्रि में घट स्थापना (ghat sthaapana) का विशेष महत्व होता है।

इन नवरात्रि में 7 अक्टूबर, गुरुवार यानी की कल कलश स्थापना या घटस्थापना किया जाएगा। घटस्थापना का शुभ समय सुबह 06 बजकर 17 मिनट से सुबह 07 बजकर 07 मिनट तक है। कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। जानकारी के लिए बता दें कि इस साल 2021 में दो तिथियां तृतीया और चतुर्थी एक साथ पड़ने के कारण नवरात्रि 8 दिनों के ही पड़ेंगे। ऐसे करें घटस्थापनाः-नियमानुसार कलश की स्थापना मंदिर के उत्तर-पूर्व दिशा में करनी चाहिए।
मां की चौकी लगा कर कलश को स्थापित करना चाहिए।
सबसे पहले उस जगह को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें।
फिर लकड़ी की चौकी पर लाल रंग से स्वास्तिक बनाकर कलश को स्थापित करें।
कलश में आम का पत्ता रखें और इसे जल या गंगाजल भर दें।
साथ में एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूर्वा, हल्दी की एक गांठ कलश में डालें।
कलश के मुख पर एक नारियल लाल वस्त्र से लपेट कर रखें।
चावल यानी अक्षत से अष्टदल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें।
इन्हें लाल या गुलाबी चुनरी ओढ़ा दें।
कलश स्थापना के साथ अखंड दीपक की स्थापना भी की जाती है।
कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा करें।
हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके मंत्र जाप करें और फूल और चावल मां के चरणों में अर्पित करें।
मां शैलपुत्री के लिए जो भोग बनाएं, गाय के घी से बने होने चाहिए।
विशेष मंत्र का जाप करें ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।