शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। शनिदेव को न्यायाधीश व कर्मफलदाता माना गया है। शनिदेव जातक को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। मान्यता है कि शनिवार के दिन शनिदेव की विधिवत पूजा करने व शनि संबंधित उपायों को करने से शनिदोष का प्रभाव कम होता है।

यह भी पढ़े : मध्य प्रदेश में 18 मुसलमान ने अपनाया हिंदू धर्म? दीक्षा लेने वालों ने खुद बताया सच

शनिवार का दिन कर्क, वृश्चिक, धनु, मीन व कुंभ राशि वालों के लिए खास है। कर्क व वृश्चिक राशि वालों पर शनि ढैय्या चल रही है, जबकि कुंभ, मीन व धनु राशि वालों पर शनि की साढ़े साती का प्रभाव है। ऐसे में इन 5 राशि वालों को शनिवार के दिन शनिदेव की विधिवत पूजा करनी चाहिए।

यह भी पढ़े : WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी : अब ग्रुप में जोड़ सकेंगे पूरे 512 मेंबर, ऐसे चेक करें आपको फीचर मिला या नहीं


ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, प्रति दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं। शाम को पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। माना जाता है कि शनि साढ़ेसाती के दौरान जो व्यक्ति पक्षियों की सेवा करना है, उस पर शनि का दुष्प्रभाव कम होता है। कहते हैं कि शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के दौरान असहाय लोगों की मदद करने से भी लाभ मिलता है।

यह भी पढ़े : Do Not Gift Money Plant: घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है मनी प्लांट का पौधा, किसी गिफ्ट न करें मनी प्लांट


जब किसी जातक की कुंडली में शनि जन्‍म‍राशि से द्वादश अथवा प्रथम या द्वितीय स्‍थान में हों तो यह स्थिति शनि की साढ़ेसाती कहलाती है। ऐसा माना जाता है कि जातक को मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ता है। शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक गतिशील रहते हैं। इसका प्रभाव एक राशि पहले से एक राशि बाद तक पड़ता है। यही स्थिति साढ़ेसाती कहलाती है। जब गोचर में शनि किसी राशि के चौथे और आठवें भाव में होता है तो यह स्थिति ढैय्या कहलाती है।