चावल यानी अक्षत हमारे ग्रंथों में सबसे पवित्र अन्न माने गए हैं। कुछ भी शुभ काम हो इनके बिना नहीं किया जाता है। जैसे कि हम जानते हैं कि किसी सामग्री को किसी भगवान को चढ़ाना निषेध है जैसे तुलसी को कुंकु नहीं चढ़ता और शिव को हल्दी नहीं चढ़ती। गणेश तो तुलसी नहीं चढ़ती तो दुर्गा को दूर्वा नहीं चढ़ती लेकिन चावल हर भगवान को चढ़ते हैं।


भगवान को चावल चढ़ाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि चावल टूटे हुए न हों। अक्षत पूर्णता का प्रतीक है। मात्र 4 दाने चावल रोज चढ़ाने से अपार ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। चावल साफ एवं स्वच्छ होने चाहिए। शिवलिंग पर अक्षत चावल चढ़ाने से शिवजी अतिप्रसन्न होते हैं और अखंडित चावल की तरह अखंडित धन, मान-सम्मान मिलता हैं।
किसी भी आराध्य को एक माह तक चार चावल दाने चढ़ाकर देखें...

घर में अन्नपूर्णा माता की प्रतिमा को चावल की ढेरी पर पर स्थापि‍त करना चाहिए। जीवनभर धन-धान्य की कमी नहीं होती हैं।

पूजन के समय अक्षत इस मंत्र के साथ भगवान को समर्पित किए जाते हैं-

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुंकमाक्ता: सुशोभिता:. मया निवेदिता भक्त्या: गृहाण परमेश्वर॥

मंत्र का अर्थ है कि हे ईश्वर, पूजा में कुंकुम के रंग से सुशोभित यह अक्षत आपको समर्पित कर रहा हूं, कृपया आप इसे स्वीकार करें।