देवगुरु बृहस्पति या गुरु ने मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर किया था। जानकारी के लिए बत दें कि देवगुरु बृहस्पति हर 13 महीने में करीब 4 महीने के लिए वक्री हो जाते हैं। गुरु 20 जून से वक्री अवस्था में हैं। देवगुरु बृहस्पति 14 सितंबर की देर रात तक कुंभ राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलेंगे। ग्रहों की उल्टी चाल से राशियां प्रभावित होगी और लोगों के जीवन में कई तरह का असर पड़ेगा।


मेष राशि के बात करें तो गुरु की वक्री चाल से  लोगों को कार्यों में सफलता के लिए अधिक मेहनत करनी होगी। पैसों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें। दांपत्य जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

वृषभ राशि के लोग इस दौरान किसी भी कार्य को करने में जल्दबाजी न करें। वाद-विवाद से दूर रहें। नया कार्य शुरू करने के लिए समय उत्तम है। व्यापार में मुनाफा हो सकता है। पारिवारिक जीवन में आनंद का अनुभव करेंगे।

मिथुन राशि वाले लोगों को  शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए ये समय थोड़ा कठिन रह सकता है। यह समय धैर्य रख काम करने का है। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। इस समय सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

कर्क राशि के लोगों को इस समय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। किसी भी कार्य को करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें। धन- लाभ के योग बनेंगे। हालांकि धन खर्च भी हो सकता है।