सोमवार से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। छह अक्तूबर तक पितरों का तर्पण किया जाएगा। धार्मिक, मांगलिक कार्य नहीं होंगे। बाजारों में खरीदारी पर भी असर पड़ेगा। पितृपक्ष संपन्न होने के बाद नवरात्र पर्व के साथ बाजार में रौनक लौटेगी।

सोमवार से पितृपक्ष शुरू हो जाएगा। छह अक्तूबर तक पितृपक्ष चलेगा। इस दौरान लोग अपने अपने पूर्वजों का श्राद्ध करेंगे। दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अनुष्ठान किए जाएंगे। पितरों के तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं। जिस तिथि को व्यक्ति का निधन होता है उसी तिथि को उसका श्राद्ध करने की परंपरा है। श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होता है। पूर्वजों की कृपा मनुष्य पर हमेशा बनी रहती है। 

इस दौरान किसी नई वस्तु की खरीदारी व गृह प्रवेश समेत अन्य मांगलिक कार्य धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ नहीं रहेगा। विधि विधान से पितरों का श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध पर्व, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का पर्व है। नई पीढ़ी में पूर्वजों के प्रति आस्था के जागरण का पर्व है। पूर्वजों की पुण्य स्मृति का पर्व है।