शनिदेव व्यक्ति को उसके बुरे कर्मों की सजा के लिए शनि साढ़ेसाती (Shani Sade Sati), शनि ढैय्या (Shani Dhaiya) या शनि महादशा (Shani Mahadasha) देते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि शनिदेव जब सजा देते हैं तो महादशा, साढ़ेसाती और शनि ढैय्या से जीवन नर्क बन जाता है। इस सजा में ना इंसान अच्छे जीवन जी पाता है और ना ही मर पाता है। इसलिए कर्म अच्छे करने चाहिए ताकी इंसान योनी का जीवन अच्छे से आनंद लेकर जिया जा सकें।
अगर आप पर शनि महादशा, शनि साढ़ेसाती और शनि ढैय्या जीवन में चल रहा है तो आपको हर शनिवार को शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए। साथ ही वो काम करने चाहिए जो शनिदेव को प्रसन्न करें। शनिदेव की पूजा के दौरान शनि मंत्रों का जाप करें और शनि चालीसा पढ़ें। इसी के साथ शनिदेव की आरती जरूर करें-
शनिदेव की आरती

भगवान शनिदेव की आरती-

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

जय जय श्री शनि देव....
श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी।

नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

जय जय श्री शनि देव....
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

जय जय श्री शनि देव....
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

जय जय श्री शनि देव....
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
अगर आप शनिवार का व्रत रखते हैं तो ये आरती करें-

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी

पहली आरती प्रहलाद उबारे हिरणाकुश नख उदर विदारे

दूसरी आरती वामन सेवा बलि के द्वार पधारे हरि देवा

तीसरी आरती ब्रह्म पधारे सहसबाहु के भुजा उखारे

चौथी आरती असुर संहारे भक्त विभीषण लंक पधारे

पांचवीं आरती कंस पछारे गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले

तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा हरषि-निरखि गावें दास कबीरा


(यह आलेख सिर्फ जनरुचि के लिए हैं, यह आलेख इन सब का दावा नहीं करता है। यह लौकिक मान्यता आधारित है।)