दिवाली (Diwali) का त्योहार कुछ घंटों में शुरू हो जाएगा। यह त्योहार हार पर जीत के लिए और श्री राम (Shri Ram) के अयोध्या में स्वागत के लिए मनाया जाता है। खासतौर से यह त्योहार मां लक्षमी (Maa Lakshmi), गणेश जी (Ganesh ji) और कुबरे जी (Kubera ji) की पूजा के साथ मनाया जाता है। मां लक्ष्मी धन के देवी और कुबेर धन के देवता कहे जाते हैं। इसमें विधि विधान के साथ पूजा करने से धन की प्राप्ति होती है और घर में सुख समृद्धि आती है।

मां लक्ष्मी पूजा (Maa Lakshmi Puja)-
 
1. ईशान कोण या उत्तर दीशा में साफ सफाई करके स्वास्तिक बनाएं। उसके उपर चावल की ढेरी रखें। अब उसके उपर लकड़ी का पाट बिछाएं। पाट के उपर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता लक्ष्मी (Maa Lakshmi) की मूर्ति या तस्वीर रखें। तस्वीर में गणेश और कुबेर की तस्वीर भी हो। माता के दाएं और बाएं सफेद हाथी के चित्र भी होना चाहिए।


2. पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश (Ganesh ji), दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। इसके बाद धूप-दीप चलाएं। सभी मूर्ति और तस्वीरों को जल छिड़ककर पवित्र करें।


3. माता लक्ष्मी की षोडशोपचार पूजा करें अर्थात 16 क्रियाओं से पूजा करें। पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार। पूजन के अंत में सांगता सिद्धि के लिए दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए।


4. माता लक्ष्मी (Maa Lakshmi) सहित सभी के मस्तक पर हलदी कुंकू, चंदन और चावल लगाएं। फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाएं। पूजन में अनामिका अंगुली (छोटी अंगुली के पास वाली यानी रिंग फिंगर) से गंध (चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी आदि) लगाना चाहिए। इसी तरह उपरोक्त षोडशोपचार की सभी सामग्री से पूजा करें।