हिंदू धर्म के पंचांग के मुताबिक वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं। पहली नवरात्रि माघ माह में, दूसरी नवरात्रि चैत्र माह में, तीसरी नवरात्रि आषढ़ महीने में मनाई जाती हैं, जबकि चौथी और आखिरी नवरात्रि अश्विन महीने में पड़ती हैं जिसे शारदीय नवरात्रि  कहा जाता हैं। इस खबर में हम आपको बताते हैं कि आखिर गुप्त नवरात्रि क्यों मनाई जाती है और इसका महत्व क्या है। 

गुप्त नवरात्रि  में प्रकट नवरात्रि की तरह गेहूं के जवारे नहीं बोए जाते हैं और न ही घट स्थापना होती है। गृहस्थों के लिए गुप्त नवरात्रि में व्रत, पूजन, जाप, देवी पाठ का महत्व है। इस नवरात्रि के पूरे नौ दिन शुद्ध आचरण, शुद्ध आहार-विहार रखना आवश्यक होता है। व्रती को नित्य प्रतिदिन देवी का पूजन करके दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, देवी महापुराण आदि का पाठ करना चाहिए। आपको बता दें कि गुप्त नवरात्रि की उपासना से जीवन तनाव मुक्त होता है। इस दौरान महाविद्या देवियां तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, काली, त्रिपुरा भैरवी , धूमावती, बगलामुखी है, जिनकी गुप्त नवरात्रि में गुप्त तरीके से पूजा की जाती हैं।

इस नवरात्रि में खास तौर से तंत्र साधना , जादू टोना, वशीकरण आदि चीजों के लिए विशेष महत्व रखता हैं। गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों तक साधक मां दुर्गा की कठिन भक्ति और तपस्या करते हैं। खासकर निशा पूजा की रात्रि में तंत्र सिद्धि  की जाती हैं। इस भक्ति से देवी मां प्रसन्न हो जाती हैं और अपने साधकों को दुर्लभ और अतुल्य शक्ति प्रदान करती हैं। ये सभी कार्य गुप्त तरीके से किए जाते हैं, इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि  कहा जाता है। इस दौरान पूजा के वक्त श्रद्धालुओं द्वारा मां दुर्गा की कठिन भक्ति और उपासना की जाती है और निशा पूजा की रात्रि में तंत्र सिद्धि की विधि भी संपन्न की जाती है। इसका आयोजन किसी उत्सव की भांति नहीं होता। प्रकट नवरात्रि से अलग इस पूजा के दौरान खास पूजा और साधना की जाती है तथा विशेष कामना हेतु तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए होती है।