यदि आप कहीं लंबी यात्रा में निकल रहे हों या किसी शुभ काम को करने के लिए जा रहें हैं तो एक बार दिशा शूल को लेकर विचार कर लेंगे तो यात्रा शुभ और मंगलकारी साबित होगी. अकसर लोग घर से निकल तो जाते हैं परंतु अनजाने में सही दिन और दिशा न होने के कारण रास्ते में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यह परेशानियां किस कारण से आ सकती है, 

दिशा का अर्थ डायरेक्शन और शूल का अर्थ है कांटा. जो कि चुभता है, कष्टकारी होता है. अब यदि आपके मार्ग में कांटे बिछे हो तो आप उस मार्ग पर जाना पसंद नहीं करेंगे. वहीं साथ ही कांटो भरे रास्ते से जिस कार्य के लिए आप जा रहे हैं, तकलीफों की वजह से उसकी सफलता में भी संदेह होगा. यानी जिस काम के लिए जाए  वह काम ही न हो तो यात्रा करने का कोई  फायदा नहीं है. रोजमर्रा के जीवन में दिशा शूल का ध्यान न दें परंतु आप यदि किसी शुभ कार्य, नए कार्य एवं लम्बी यात्रा के लिए जा रहे हों तो दिशा शूल विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए. दिशा शूल के महत्व और उसके मर्म को देश काल परिस्थिति के अनुसार समझना बहुत ही जरूरी है. आज हम लोग दिशा शूल के विषय में बात करते हैं. 

रोजमर्रा के काम में दिशा शूल का महत्व नहीं है . जैसे ऑफिस जाना है आप दिशा शूल देखेंगे तो बात गड़बड़ हो सकती है. बच्चे स्कूल जाने में दिशा शूल देखना ठीक नहीं. दैनिक कार्यों को दिशा शूल में शामिल करके खुद कंफ्यूज न हो.

अब यह जानना जरूरी है कि आखिर दिशाशूल क्या होता है ? दिशाशूल वह दिशा है जिस तरफ यात्रा नहीं करना चाहिए, क्योंकि उससे मनोवांछित लाभ मिलने में संदेह होता है. यात्रा का फल अच्छा नहीं होता है. खास बात यह कि हर दिन किसी एक दिशा की ओर दिशाशूल होता है. इनसे संबंधित कुछ पुरानी कहावतें भी  है : - 

सोम सनीचर पूरब न चालू. मंगल बुध उत्तर दिश कालू.

रवि शुक्र जो पश्चिम जाय. हानि होय पथ सुख नहीं पाए.

बीफे दक्खिन करे पयाना. फिर नहिं समझो ताको आना.

अर्थात -

सोम-शनिवार को पूर्व दिशा (East )

रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा (West)

मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा (North)

गुरुवार को दक्षिण दिशा (South)

अगर जाना ही पड़े तो क्या करें - 

अगर दिशा शूल के दिन जाना बहुत ही जरूरी हो तो कुछ उपाय करके ही जाएं.  

दिशा शूल में निकलने से एक दिन पहले जो लगेज या सामान आपको ले जाना है वह सब घर से पहले दिन निकाल कर कहीं और रखवा दें.

सोम-शनिवार पूर्व दिशा की ओर घर से निकलना पड़े तो सूर्य भगवान को प्रणाम करते हुए यात्रा सफल होने की प्रार्थना करनी चाहिए.  

रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा की तरफ निकलते समय शिव उपासना करके निकलना चाहिए. शिवायल में दर्शन करते हुए यात्रा प्रारम्भ करें.  

मंगलवार और बुधवार को सिंदूर लेप वाले श्रीगणपति की उपासना करना बहुत जरूरी है. तभी कार्य सफल होंगे.  

गुरुवार को यदि बहुत ही जरूरी हो तो हनुमान जी के दर्शन करते हुए ही निकले. निकलने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य कर लें.