हिंदू धर्म में Mahashivratri को सबसे बड़े धार्मिक पर्वों में से एक माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह पर्व इस साल 1 मार्च, मंगलवार को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह रचाया जाता है और रुद्राभिषेक किया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस साल की महाशिवरात्री सबसे खास है क्‍योंकि इस दिन पंचग्रही योग बन रहा है। इन शुभ संयोगों में शिव जी की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होगी और पूजा का कई गुना ज्‍यादा फल मिलेगा।

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ज्योतिषीय के अनुसार महाशिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र में परिध योग रहेगा। फिर धनुष्ठा के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा परिध योग और शिव योग रहेगा। ये योग शत्रु पर विजय दिलाने में बहुत अहम हैं। इसके अलावा इन नक्षत्रों में की गई पूजा का कई गुना ज्‍यादा फल मिलता है।


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इसके अलावा मकर राशि में पंचग्रही योग भी बन रहा है। महाशिवरात्रि के दिन मकर राशि में मंगल, शनि, बुध, शुक्र और चंद्रमा रहेंगे। लग्न में कुंभ राशि में सूर्य और गुरु की युति बनेगी। राहु वृषभ राशि में रहेगा, जबकि केतु दसवें भाव में वृश्चिक राशि में रहेगा। यह ग्रहों की दुर्लभ स्थिति है और खासी लाभकारी है।


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महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
1 मार्च को सुबह 11.47 से दोपहर 12.34 तक अभिजीत मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर 02.07 से 02.53 तक विजय मुहूर्त रहेगा। शाम को 05.48 से 06.12 तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा। पूजा या शुभ कार्य करने के लिए अभिजीत और विजय मुहूर्त को श्रेष्‍ठ माना जाता है।

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शिवरात्रि के दिन शिव जी का पंचामृत से अभिषेक करें। उन्‍हें चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व वस्‍त्र चढ़ाएं. दीपक जलाएं। केसर युक्त खीर का भोग लगाएं। साथ ही ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय, रूद्राय शम्भवाय भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।