वीर हनुमान बजरंग बली जी की महिमा अपरंपार है और इनकी शक्ति का कोई सानी नहीं है। राम भक्त हनुमान जी की आराधना से हर मुश्किल आसान हो जाती है। अगर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो यकीन मानिए आपकी हर परेशानी दूर हो जाएगी। 

हनुमान चालीसा को पढ़ने मात्र से आपकी सारी परेशानियां खत्म हो जाती है। बजरंग बली की कृपा से संकट आपको छू भी नहीं सकता। हनुमान चालीसा से हनुमान जी बहुत जल्द प्रसन्न हो उठते हैं। चालीस लाइनों वाली हनुमान चालीसा को पढ़ने से मन को शांति और शक्ति मिलती है।

हनुमान चालीसा की महिमा :-

हनुमान चालीसा दुनिया की सबसे सरल और शक्तिशाली स्तुति है। ये सम्पूर्ण रूप से बहुत प्रभावशाली मानी गई है। इसकी हर चौपाई अलग अलग रूप से शक्तिशाली है। जीवन की हर समस्या का समाधान हनुमान चालीसा द्वारा किया जा सकता है। हनुमान चालीसा का पाठ सिद्ध कर लेने से साधक चमत्कारी हो जाता है।

खोले के हनुमान, जयपुर 

हनुमान चालीसा की प्रत्येक पंक्ति का अपना अलग महत्व और महिमा है और उसका जाप करने से उसका असर आपकी किसी भी परेशानी का हल निकाल सकता है।

बजरंग बली की महिमा ही कुछ ऐसी है कि उनके नाम मात्र से ही कष्टों का निवारण हो जाता है। लेकिन ऐसे मे यह जानना बहुत जरूरी है कि हनुमान चालीसा को पढ़ने के नियम क्या होते हैं? नियमों को मानना बहुत जरूरी होता है क्योंकि नियमों के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ करने से आपकी प्रार्थना तुरंत स्वीकार होती है।

संकट-मोचन-हनुमान-मंदिर, वाराणसी 

हनुमान चालीसा पढ़ने के नियम :-

- हनुमान जी और इनके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी के चित्र की स्थापना करे।

- इसके बाद उनके समक्ष जल से भरा पात्र रखें।

- पहले भगवान् राम फिर हनुमान जी का ध्यान करें।

- इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें।

- कम से कम एक बार से लेकर सौ बार तक हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है।

- पाठ के बाद जल को प्रसाद की तरह ग्रहण करें।

- हमेशा यह प्रयास करें कि हनुमान चालीसा के पाठ का समय रोज एक ही हो।

- विशेष दशाओं मे यात्रा और सोते समय भी चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

हनुमान चालीसा को पढ़ने के नियमों को खास तरीके से किया जाना बहुत जरूरी होता है क्योंकि हनुमान चालीसा का असर उस पर काफी निर्भर करता है। हनुमान चालीसा का पाठ एक ही समय पर हो यह भी बहुत जरूरी होता है। लेकिन आपको जानकर काफी हैरानी होगी कि हनुमान चालीसा के कुछ विशेष प्रयोग भी हैं जो आश्चर्यजनक रूप से शक्तिशाली हैं।

इस संसार में ऐसा कोई काज नहीं है जो कि वीर हनुमान जी की आराधना से पूरा न हो। हनुमान चालीसा की हर एक लाइन में इतनी शक्ति समायी है कि इसके नियमित पाठ से आपको कोई कष्ट हो ही नहीं सकता।

फिर चाहे आर्थिक परेशानी हो या शत्रु बाधा। या फिर कोई अनजाना भय आपको परेशान कर रहा हो। हनुमान चालीसा के प्रभाव से सभी सवालों का जवाब मिल जाता है।

॥ श्री हनुमान चालीसा ॥

॥ दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज

निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु

जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके

सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं

हरहु कलेस बिकार ॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी ।

कुमति निवार सुमति के संगी ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुण्डल कुँचित केसा ॥४

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै ।

काँधे मूँज जनेउ साजै ॥

शंकर सुवन केसरी नंदन ।

तेज प्रताप महा जगवंदन ॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मन बसिया ॥८

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचन्द्र के काज सँवारे ॥

लाय सजीवन लखन जियाए ।

श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना ।

लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥

जुग सहस्त्र जोजन पर भानु ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥२०

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहू को डरना ॥

आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हाँक तै काँपै ॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।

महावीर जब नाम सुनावै ॥२४

नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

संकट तै हनुमान छुडावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥

सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिनके काज सकल तुम साजा ॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८

चारों जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।

असुर निकंदन राम दुलारे ॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२

तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥

और देवता चित्त ना धरई ।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६

जै जै जै हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥

जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बंदि महा सुख होई ॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय मह डेरा ॥४०

॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरन,

मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित,

हृदय बसहु सुर भूप ॥