शारदीय नवरात्रि (Sharadiya Navratri) आरंभ होने वाले हैं और माता दुर्गा धरती पर आने वाली है। माता के आगमन पर दुर्गा मां की पूजा अर्चना की जाती है और व्रत भी रखा जाता है। 9 दिनों तक माता के अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है। पूजा करने के साथ साथ दुर्गा मां का आर्शीवाद और कृपा पाने के लिए श्री दुर्गासप्तशती के पाठ किया जाता है। यह पाठ बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है।
जानकारी के लिए बता दें कि सनातन धर्म में श्रीदुर्गासप्तशती विशिष्ट प्रतिष्ठा है। इसके पाठ से मनोकामना पूरी होती हैं। साथ ही निष्काम भक्त इनके सहारे परम दुर्लभ मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

श्री दुर्गासप्तशती के पाठ


प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य


इसका अर्थ है कि ‘शरणागत की पीड़ा दूर करने वाली देवि! हम पर प्रसन्न हो। सम्पूर्ण जगत की माता! प्रसन्न हो। विश्वेश्वरि! विश्व की रक्षा करो। देवी! तुम्हीं चराचर जगत की अधीश्वरी हो।’


रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

यह मंत्र रोजगार के लिए भी बहुत लाभप्रद है-

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥