हिन्दू घरों में किसी न किसी देवता की मूर्ति जरूर होती है। इसमें से गणेश जी मूर्ति तो होती है। लेकिन लोग मूर्ति को किसी भी जगह और दिशा में रख देते हैं। मूर्ति घर में स्थापित करने के कुछ नियम होते हैं, तभी घर में सुख समृद्धि आती है। अगर आपने भी मूर्ति को ऐसे ही रख रखी है तो तुरंत बदल दें। ज्योतिष के मुताबिक गणपति की मूर्ति रखने के लिए सबसे अच्‍छी दिशा घर का उत्तर पूर्व का कोना है।

यदि यहां पर गणपति की मूर्ति रखना संभव न हो तो उत्‍तर या पूर्व दिशा को चुनें लेकिन गलती से भी दक्षिण दिशा में भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित न करें। यह दिशा देवी-देवताओं की पूजा के लिए अशुभ मानी गई है। साथ ही ध्‍यान रखें कि जहां मूर्ति स्‍थापित करें, वहां आसपास गंदगी न रहे, ना ही कूड़ा-कचरा या टॉयलेट हो।

धातु या गोबर की हो मूर्ति
मूर्ति स्‍थापित करते समय यह भी ध्‍यान रखें कि मूर्ति मिट्टी, गोबर या धातु की हो। कभी प्लास्टर ऑफ पेरिस या कांच की मूर्ति न रखें। देवी-देवताओं की मूर्तियां हमेशा शुद्ध धातु या मिट्टी-गोबर की होनी चाहिए। तभी वे घर में सुख-समृद्धि लाती हैं। मूर्ति दूर करेगी वास्‍तु दोष यदि घर में झगड़े होते हों, आर्थिक हानि हो रही हो, जीवन कष्‍टों से घिर गया हो तो इसके पीछे घर के वास्‍तु दोष बड़ा कारण हो सकते हैं। ऐसे में घर के मुख्‍य दरवाजे पर चौखट के ऊपर या एंट्री गेट के सामने गणपति की दो मूर्ति या तस्‍वीर इस तरह लगाएं, जिनमें दोनों की पीठ एक-दूसरे से जुड़ी हो।


इससे एक मूर्ति या तस्‍वीर में गणपति का मुंह घर के अंदर की ओर और दूसरा बाहर की ओर हो। ध्‍यान रखें कि मूर्ति या फोटो एक बराबर आकार की हों। ऐसा करने से घर की नकारात्‍मक ऊर्जा और वास्‍तु दोष खत्‍म हो जाते हैं।