जन्म कुंडली में भाग्य नवम स्थान होता है। नवम स्थान के स्वामी देवगुरु बृहस्पति माने गए हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जन्म कुंडली में नवम स्थान पीड़ित है या कुंडली में कोई भी ग्रह योग नक्षत्र अशुभ फल प्रदान कर रहा है तो इस नवरात्रि में कुछ विशेष उपाय करें।

इससे आपकी किस्मत के सातों ताले खुल जाएंगे और भाग्य उदय हो कर आपके जीवन की सभी परेशानियां समाप्त हो जाएंगी और आपके परिवार में सुख शांति समृद्धि में वृद्धि होगी। व्यापार-नौकरी में सफलता मिलने लगेगी। अविवाहित का विवाह हो जाएगा। उत्तम संतान की प्राप्ति हो।

नवरात्रि का आरंभ 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से होने जा रहा हैं। शुभ मुहूर्त में संकल्प लेकर ग्रह दोष निवारण हेतु उपाय करें। अगर आपकी जन्म कुंडली के भाग्य भाव में नवग्रहों में से कोई भी ग्रह पीड़ित है और भाग्य उदय होने में परेशानी आ रही है तो ग्रहों को उच्च करने तथा शुभ फल प्राप्ति के लिय ग्रहों के दोष निवारण हेतु वैदिक ब्राह्मणों द्वारा इस बसंत नवरात्रि में यह उपाय करवाएं या करें। नवरात्रि के नौ दिनों में देव्य शक्तियां जागृत हो जाती हैं और सभी ग्रह शुभ फल देने लग जाते हैं।

उपाय- 

सूर्य- आदित्य ह्रदय स्तोत्र तथा राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें। सूर्य ग्रह के निमित्त मंत्र जप करवाएं।

चंद्र- शिव सहस्त्रार्चना रुद्राभिषेक का पाठ करवाएं। योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह के बाद ही मोती या चांदी धारण करें।

मंगल- राम चरित मानस का पाठ करें। योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह पर मूंगा  रत्न धारण करें।

बुध- श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें। ज्योतिषाचार्य की सलाह पर पन्ना रत्न  धारण करें। बुध ग्रह के मंत्रों का जप करवाएं।

गुरु- श्री श्रीमद्भागवत गीता तथा रामचरितमानस का पाठ करें। रत्न उपरत्न पुखराज सोना धारण करें।

शुक्र- हीरा या ओपेल धारण करें। श्रीमददुर्गा सप्तशती का पाठ करवाएं।

शनि- हनुमान जी को तेल का अभिषेक करवाएं। साथ ही वाल्मीकि सुंदरकांड का पाठ करें।

राहु- श्रीमद् वाल्मीकि रामायण पाठ करवाए साथ ही गोमेद धारण करें।

केतु- लहसुनिया रत्न धारण करें। सुंदरकांड का पाठ करवाएं।

यह सभी उपाय नवरात्रि में वैदिक धर्म शास्त्र के अनुसार वैदिक ब्राह्मणों से करवाने पर शीघ्र फल प्राप्ति होती है। साथ ही भाग्य उदय होने लगता है। रुके हुए कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं।