त्रिपुरा (Tripura) में विपक्षी दलों ने राज्य में सांप्रदायिक हिंसा पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर 102 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस की निंदा की। इन लोगों, जिनमें पत्रकार, अधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं, पर आपराधिक साजिश और जालसाजी के आरोपों के साथ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चार वकीलों के खिलाफ यूएपीए और भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, जो कथित तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाने वाली हालिया हिंसा पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट के साथ सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए थे।


ऐसे सभी खातों को फ्रीज करने के लिए ट्विटर (Twitter), फेसबुक और यूट्यूब को भी नोटिस दिए गए थे। कांग्रेस  (Congress) ने उन सभी के खिलाफ मामले वापस लेने की मांग की, जिन पर कथित तौर पर "सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने" की कोशिश करने के लिए मामला दर्ज किया गया था।
पानीसागर की मस्जिद पर विहिप के कार्यकर्ताओं ने हमला किया और अल्पसंख्यक समुदायों के घरों में तोड़फोड़ की… पहले उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि राज्य का दौरा करने वाले वकील किसी बुरे इरादे से आए थे और उन्होंने कोई सांप्रदायिक नफरत (communal violence) नहीं फैलाई।
26 अक्टूबर को, राज्य के पानीसागर शहर में हिंसा भड़क उठी, जहां एक मस्जिद, कुछ घरों और दुकानों में विहिप कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की। यह घटना उस समय हुई जब विहिप कार्यकर्ताओं ने 26 अक्टूबर को बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा (communal violence) के विरोध में एक रैली निकाली थी।