बुद्ध पूर्णिमा अर्थात सोलह मई को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह वृश्चिक राशि में रहेगा। भारतीय समय के अनुसार यह सुबह 7 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।

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दिन में होने के कारण यह भारत में तो दिखाई नहीं देगा। इसलिए सूतक काल तो मान्य नहीं होगा। मगर ग्रहण के समय बनने वाली ग्रहों की स्थिति पूरा प्रभाव देश और दुनिया पर पड़ेगा। अत: इस दौरान शुभ कार्य करने से बचना हितकर रहेगा। यह जानकारी देते हुए लाइनपार माता मंदिर के पास स्थित हरि ज्योतिष संस्थान के ज्योतिर्विद सुरेंद्र शर्मा ने बताया ग्रहण के समय जहां रात होगी वहां इसे देखा जा सकता है। इस चंद्र ग्रहण का दुर्लभ योग बहुत लंबे समय बाद बन रहा है और चंद्रमा खूनी लाल रंग में नजर आयेगा।

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कहां नजर आएगा ग्रहण

चंद्र ग्रहण दक्षिणी अमेरिका,चिली, पेरू,ब्राजील, अर्जेंटीना, रोमानिया,सूडान, केन्या, जर्मनी, न्यूजीलैंड,मेक्सिको,पोलैंड,उत्तरी पेसिफिक सागर में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। जहां स्थानीय समय के अनुसार रात होगी वहीं चंद्र ग्रहण देखा जा सकेगा। अफ्रीका एवं यूरोप में भी यह ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा।

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अवधि, दुर्लभ योग और राशि पर प्रभाव

चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे, 27 मिनट और 58 सेकेंड होगी। यह एक दुर्लभ योग है। क्योंकि चांद इस बार खूनी लाल रंग का दिखाई देगा। यह दोनों संयोग बहुत लंबे अंतराल के बाद आते हैं। वैज्ञानिक इसे सुपर लूनर इवेंट कह रहे हैं। यह पूर्ण ग्रहण होगा और चांद का रंग भी खूनी लाल रंग का होगा। राशि के अनुसार यह मेष, सिंह और धनु राशि के लिए शुभ व अन्य के लिए सामान्य होगा।

भारत में ये ग्रहण नजर आएंगे

भारत में इस वर्ष केवल दो ही ग्रहण नजर आएंगे। पहला सूर्यग्रहण 25 अक्टूबर को धूमवती अमावस्याको लगेगा। दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। यह 8 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा को रहेगा। इस दोनों का असर भारत में पूरी तरह रहेगा।