चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन यानी दुर्गा अष्टमी कल, मंगलवार, 20 अप्रैल को है। आपको बता दें कि नवरात्रि के दौरान अष्टमी व नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इन दो दिनों मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने से विशेष लाभ होता है। माता सुख-समृद्धि व निरोग रहने का आशीर्वाद देती है। अष्टमी तिथि पर माता महागौरी के अलावा कन्या पूजन की भी परंपरा होती है। जिसके बिना अष्टमी की पूजा अधूरी मानी जाती है।

अष्टमी की पूजा मुहूर्त

20 अप्रैल की सुबह: 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 05 मिनट तक

20 अप्रैल की दोपहर: 01 बजकर 40 मिनट से 03 बजकर 50 मिनट तक

अष्टमी तिथि की पूजा विधि

अष्टमी के दिन कन्या पूजन करनी चाहिए

इसके लिए सुबह स्नानादि करके भगवान गणेश व महागौरी की पूजा अर्चना करें

फिर 9 कुंवारी कन्याओं को घर में सादर आमंत्रित करें

उन्हें सम्मान पूर्वक आसन पर बिठाएं

फिर शुद्ध जल से उनके चरणों को धोएं

अब तिलक लगाएं,

रक्षा सूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प भेंट करें

अब नयी थाली में उन्हें पूरी, हलवा, चना आदि का भोग लगाएं

भोजन के बाद कुंवारी कन्याओं को मिष्ठान व अपनी क्षमता अनुसार द्रव्य, कपड़े समेत अन्य चीजें दान करें।

अंतिम में उनकी आरती करें व चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें

फिर संभव हो तो सभी कन्याओं को घर तक जाकर विदा करें।

अष्टमी पूजा का महत्व

ऐसी मान्यता है कि नवरात्र पर अष्टमी पूजा करना बेहद शुभ होता है।

इस दौरान मां महागौरी के स्वरूप में जागृति होती है

माता महागौरी के मंत्र व हवन के माध्यम से उनसे सुख समृद्धि, मान-सम्मान व आरोग्य रहने का आशीर्वाद मांगा जा सकता है।

विधिपूर्वक मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है व कष्टों का भी निवारण होता है।