जिले भर में अक्षय तृतीया का पर्व तीन मई यानि कल मंगलवार को मनाया जायेगा। इस दिन धरती पूजन के साथ ही दान-पुण्य व सोना खरीदने की प्राचीन परम्परा है। इस दिन किसान मां अन्नपूर्णा यानि पृथ्वी का पूजन-अर्चन करते हैं। पर्व को लेकर आभूषण के कारोबारी लुभावने ऑफर देने का बोर्ड पहले से ही लगा रखे हैं। आमजन में यह धारणा है कि इस दिन किये गये पुण्य कार्य का क्षय नहीं होता। 

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कृषि प्रधान देश होने के चलते भी अक्षय तृतीया का खासा महत्व है। किसान इस दिन धरती मां का विधि विधान से पूजन-अर्चन कर वर्ष भर अन्न प्रदान करने की मन्नते मांगते हैं। पुराणों में वर्णन के अनुसार भगवान विष्णु के अंशावतार महर्षि परशुराम के रूप में अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था, त्रेतायुग भी इसी तिथि से शुरू हुआ था। साथ ही पाप नाशिनी मां गंगा व मां अन्नपूर्णा का अवतरण भी त्रेतायुग में इसी तिथि को हुआ था।

अक्षय तृतीया पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इंदरपुर थम्हनपुरा निवासी आचार्य पं. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया पावन पर्व है। बताया कि ‘अक्षय का अर्थ होता है जो कभी खत्म न हो और इसलिए ऐसा कहा जाता है कि ‘अक्षय तृतीया यह वह तिथि है जिसमें सौभाग्य और शुभ फल का कभी क्षय नहीं होता है।

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 इसलिए ऐसा कहा जाता है कि इस दिन मनुष्य जितने भी पुण्य कर्म तथा दान करता है, उससे उसका शुभ फल अधिक मात्रा में मिलता है और शुभ फल का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता है। महर्षि वेदव्यास ने इसी दिन से महाभारत लिखना शुरू किया था। इस दिन ही युधिष्ठिर को ‘अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी। इस दिन ही बद्री केदारनाथ की यात्रा भी शुरू होती है। बताया कि इस तिथि को गृहप्रवेश, नींव पूजा, नए कारोबार की शुरूआत वाहन खरीदने आदि के लिए यह तिथि उपयुक्त मानी जाती है।