गुवाहाटी: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को बारपेटा की एक स्थानीय अदालत द्वारा गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ "झूठी प्राथमिकी" दर्ज करने के लिए असम पुलिस की खिंचाई के बाद फटकार लगाई।

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चिदंबरम ने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री सरमा सीबीआई को यह पता लगाने के लिए सौंपेंगे कि वह "पागल व्यक्ति" कौन था जिसने मेवाणी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

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विधायक जिग्नेश मेवाणी को जमानत देते हुए बारपेटा जिला और सत्र ने गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ "झूठा" मामला दर्ज करने और "अदालत और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग" करने के लिए असम पुलिस की खिंचाई की। अदालत ने पाया कि जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ हमले का मामला अदालत की कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए उन्हें लंबी अवधि के लिए हिरासत में रखने के लिए "निर्मित" किया गया था।

चिदंबरम ने कहा कि अदालत ने पाया कि कोई भी समझदार व्यक्ति दो पुरुष पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में एक महिला पुलिस अधिकारी का शील भंग करने का इरादा नहीं कर सकता था और कहा कि प्राथमिकी में कोई दम नहीं है।

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा कि अदालत ने पाया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मेवाणी एक पागल व्यक्ति थे। उन्होंने कहा अगर मिस्टर मेवाणी पागल नहीं थे और फिर भी उनके खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज की गई थी तो कोई ऐसा होगा जो पागल था?" 

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चिदंबरम ने पूछा, क्या असम के मुख्यमंत्री सीबीआई को यह पता लगाने के लिए मामला सौंपेंगे कि श्री मेवाणी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने वाला पागल व्यक्ति कौन था?"  बारपेटा रोड पुलिस थाने में दर्ज मामले में मेवाणी को 1,000 रुपये के व्यक्तिगत पहचान (पीआर) बांड पर जमानत दी गई थी।

उसे इस मामले में 25 अप्रैल को महिला पुलिस अधिकारी पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जब उसे गुवाहाटी से कोकराझार लाया जा रहा था। मेवाणी को पिछले हफ्ते असम पुलिस ने गुजरात से पकड़ा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक ट्वीट के लिए गिरफ्तार किया था।