देश में कई तरह की जातियां है जिनको कई तरह के अधिकार दिए गए लेकिन सच तो ये है कि  उऩको ये अधिकार मिल ही नहीं पाते है। यही कारण ये जनजातियां अभी तक भी पिछड़े वर्ग में आती है। इसी तरह से बात करें तो असम सरकार द्वारा गठित मंत्रियों का समूह (GoM) राज्य की छह जातीय जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने के बारे में 30 अक्टूबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

GoM ने उन 6 जातीय समुदायों के नेताओं के साथ एक चर्चा की, जो वर्षों से ST की स्थिति की मांग कर रहे थे। GoM के प्रमुख मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि राज्य सरकार स्थायी है। इसकी के साथ 60 प्रतिशत मुद्दों को हल कर दिया गया है और जनजातियों की समस्या का समाधान किया गया है। इससे हम आश्वस्त हैं कि इसका एक स्थायी समाधान निकल जाएगा। कई मुद्दों का अंतिम परिणाम पर इसका महत्वपूर्ण असर पड़ेगा।


सरमा ने कहा कि 6 समुदायों के प्रतिनिधियों- कोच-राजबंशी, ताई-अहोम, मोरन, ताई मुटॉक, चुटिया और आदिवासियों ने बैठक के दौरान अपने रुख को स्पष्ट किया। इस मुद्दे पर कोई अधिक औपचारिक चर्चा नहीं होगी और केंद्र अंतिम GoM रिपोर्ट के आधार पर कार्य करेगा। उन्होंने कहा, 'बेशक कुछ मुद्दों पर अनौपचारिक पार्ले हो सकते हैं लेकिन हमने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है और अगर केंद्र हमारी रिपोर्ट से संतुष्ट है तो वह तुरंत फैसला ले सकता है।