पूर्वोत्तर राज्यों के लिए  केंद्र सरकार ने खुशखबरी दी है। इन्होंने आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 6,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर पूर्वोत्तर क्षेत्र विद्युत प्रणाली सुधार परियोजना (NERPSIP) की संशोधित लागत अनुमान (RCE) को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट समिति की बैठक प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई थी। यह विकास अंतर-राज्य संचरण और वितरण प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम प्रतीत होता है।


आधिकारिक बयान में बताया गया है कि यह योजना पावरग्रिड, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है, जो पूर्वोत्तर के छह लाभार्थी राज्यों असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा के सहयोग से है। इनको दिसंबर 2021 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना संबंधित पूर्वोत्तर के कुल आर्थिक विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर-राज्य संचरण और वितरण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।


इस योजना के तहत कार्यान्वयन एजेंसियां अपने निर्माण कार्यों के दौरान काफी संख्या में स्थानीय जनशक्ति को काम पर रख रही हैं, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुशल और अकुशल जनशक्ति के लिए बहुत सारे रोजगार पैदा होते हैं। पूरा होने के बाद, मानक मानदंडों के अनुसार इन नव निर्मित परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव के लिए अतिरिक्त जनशक्ति की आवश्यकता होगी, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे। जानकारी के लिए बता दें कि इस योजना को शुरू में दिसंबर 2014 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में अनुमोदित किया गया था।