असम के कोकराझार जिले की एक अदालत ने गुजरात के वाडगम से निर्दलीय विधायक एवं दलित नेता जिग्नेश मेवानी को सोमवार को जमानत दे दी। मेवानी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित अपमानजनक ट्वीट करने के आरोप में गुजरात के बनासकांठा जिले से बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। 

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विधायक को रविवार को कोकराझार में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने जमानत याचिका पर फैसला सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया था और मेवानी को एक दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। मेवानी को गुरुवार सुबह गुवाहाटी ले जाया गया और उसके बाद सड़क मार्ग से कोकराझार जिले ले जाया गया, जहां एक स्थानीय अदालत ने उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।

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बता दें कि मेवानी के समर्थन में कांग्रेस ने धरना-प्रदर्शन किया था। रविवार को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन बोरा और विधायक दिगंता बर्मन व एस के राशिद ने पार्टी कार्यालय से कोकराझार पुलिस थाने तक एक मौन मार्च किया था। बता दें कि कांग्रेस द्वारा समर्थित निर्दलीय विधायक मेवानी को प्रधानमंत्री के खिलाफ उनके कथित ट्वीट को लेकर कोकराझार पुलिस थाने में आईपीसी की विभिन्न धाराओं और आईटी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज होने के बाद बुधवार रात गुजरात के पालनपुर से गिरफ्तार किया गया था. एफआईआर में उन्होंने अपने ट्वीट में कथित तौर पर कहा था कि पीएम मोदी गोडसे को भगवान मानते हैं।