गरीबी और बेरोजगारी ने असम में घटनाओं का एक अलग मोड़ ले लिया है। असम के कई युवा अब कथित तौर पर दिल्ली से चलाए जा रहे एक बड़े ट्रांसजेंडर रैकेट में फंस चुके हैं। इन युवाओं को पहले असम के बाहर नौकरी का प्रस्ताव दिया जाता है। बाद में उनका ऑपरेशन कर उन्हें जबरदस्ती ट्रांस-पर्सन में बदल दिया जाता है। वहीं इस ऑपरेशन के बाद असम से रोजगार की तलाश में आए इन परिवर्तित ट्रांसजेंडरों को पैसे कमाने के लिए दिल्ली की सड़कों पर छोड़ दिया जाता है।

दरअसल इस बड़े रैकेट का भांडाफोड़ गुवाहाटी में सामने आए एक मामले के बाद हुआ। वहीं इस मामले में असम के पूरे मानव तस्करी अभियान को कथित रूप से नियंत्रित करने वाले मुख्य आरोपी पिंकी सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ट्रांस एक्टिविस्ट और एडवोकेट स्वाति बिधान बरुआ ने मंगलवार को पानबाजार महिला थाने में इस रैकेट के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है।

स्वाति ने बताया “असम के अलग अलग क्षेत्रों जैसे धुबरी, मनकाचर आदि से आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को सर्जरी के लिए दिल्ली ले जाया जाता है, जहां उनका बधियाकरण किया जाता है और उन्हें ट्रांसजेंडर या ‘किन्नर’ में बदल दिया जाता है। उन्होंने बताया कि युवाओं का सर्जरी करने के बाद रैकेट उन्हें जबरदस्ती दिल्ली की गलियों में भीख मांगने में लगा देता है। वहीं उनसे ये काम कुछ महीनों तक करवा कर उन्हें असम भेज दिया जाता है और वहां भी उन्हें भीख मांगने के लिए असम के बाजारों में फैला दिया जाता है। ”

एडवोकेट बरुआ ने आरोप लगाया कि असम में पूरे ट्रांसजेंडर रैकेट के लिए गुवाहाटी स्थित ट्रांस-वुमन पिंकी उर्फ ​​मोहम्मद अली जिम्मेदार है। जैसा कि आरोप है, पिंकी और उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति मोहम्मद आरिफ कमीशन के आधार पर रैकेट चलाते हैं। पानबाजार महिला थाना के अधिकारियों ने अब तक रैकेट में शामिल छह ट्रांसजेंडरों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कहा कि इस रैकेट में शामिल कई लोग युवा हैं और वे शादीशुदा हैं और कुछ के तो बच्चे भी हैं। इस अवैध धंधे को चलाने की मुख्य आरोपी पिंकी ने अबतक इस काम से करोड़ों रुपये कमाए हैं। उन्होंने इस नौकरी से बड़ी संपत्ति हासिल की है और हम अदालत की अनुमति से उनकी संपत्ति को भी जब्त करने का प्रयास करेंगे।