असम में आईआईटी गुवाहाटी, एनआईटी सिलचर और डिब्रूगढ विश्वविद्यालय ने मिलकर किसानों को बेहतर तरीके से प्रबंधन करने और मुश्किल स्थिति की निगरानी के लिए बहुभाषी स्मार्टफोन एप्लिकेशन विकसित किया है।

कृत्रिम मेधा के माध्यम से खेत की उत्पादकता अधिकतम करने के लक्ष्य से विकसित ‘एगस्पीक’ नामक एप किसानों को अपने स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिए निर्णय लेने एवं खेती संबंधी गतिविधियों का प्रबंधन करने में मदद करेगा।

गुवाहाटी के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के निदेशेक टी जी सीताराम ने कहा कि भारत प्रचुर संभावना वाला एक अग्रणी कृषि देश है , फिर भी 2019 में ही करीब दुनिया में दो अरब लोगों को सुरक्षित पोषक और पर्याप्त खाद्यान्न मयस्सर नहीं था।

इस वैश्विक भूखमरी को समाप्त करने के लिए हमें अगले 15 सालों में कृषि उत्पादकता दोगुणा करने की जरूरत है। जबतक हम कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का उपयुक्त रूप से इस्तेमाल नहीं करेंगे तब तक यह संभव नहीं होगा।

इस संस्थान के विद्यार्थी मानिक मित्तल के अनुसार स्टार्टअप पूर्वोत्तर भारत में इस पहल में अगुवाई कर रहा है, जहां विविध पारिस्थितिकियों के साथ अदोहित संभावनाएं हैं तथा कृषि एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है। उन्होंने कहा कि यह विकसित एप्लिकेश बहुभाषी है और उसमें असमिया भाषा का भी विकल्प है। यह विशेषता बाजार में उपलब्ध सभी कृषि-प्रौद्योगिकी एप्लिकेशनों में पहला है।

उन्होंने कहा कि एगस्पीक वर्षा, सूर्यकिरण की अवधि, मृदा स्वास्थ्य स्थिति जैसे 20 अहम मापदंडों पर विचार करता है और किसानों को पहले सही संभावित खतरों को लेकर सावधान कर देता है एवं उन्हें उनसे निपटने के तरीके भी सुझाता है।