देश के पूर्वोत्तर इलाके में आजादी के लंबे समय बाद भी उग्रवाद और हिंसा की वजह सुर्खियों में रहा है। असम में उग्रवाद के चलते काफी दशकों को अशांति देखने को मिली है। हालांकि, कई समझौते के बाद उग्रवाद की घटनाओं में कमी आई है। लेकिन पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा विवाद और इनर लाइन परमिट और एनआरसी जैसे मामलों से समय-समय पर यहां अशांति फैलती रहती है।

उग्रवाद के चलते हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ी

दरअसल, आजादी के बाद से ही असम में उग्रवाद की समस्या ने जिस गंभीरता से सिर उठाया उससे हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इनमें बोडो उग्रवादियों नरसंहार की कई घटनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही उल्फा जैसे उग्रवादी संगठनों ने दो दशकों तक राज्य में जो आतंक और हिंसा फैलाई उसकी कोई मिसाल नहीं मिलती। 2014 में बोडो उग्रवादियों ने हमला कर 75 से ज्यादा आदिवासियों को मौत के घाट उतार दिया था।

एनआरसी को लेकर तनाव

नेशनल सिटिजन रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम लिस्ट के प्रकाशन से पहले 2019 में असम में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। इसका कारण हिंसा की आशंका और सांप्रदायिक झड़पों की आशंका थी। एनआरसी असम में रह रहे भारतीय नागरिकों की एक लिस्ट है। इसे राज्य में अवैध तरीके से घुस आए तथाकथित बंगलादेशियों के खिलाफ असम में हुए छह साल लंबे जनांदोलन के नतीजे के तौर पर भी समझा जा सकता है।

इनर लाइन परमिट

इनर लाइन परमिट (आईएलपी) प्रणाली भी असम में बार-बार होने वाली अशांति के जिम्मेदार है। इसके तहत इलाके के चार राज्यों- अरुणाचल, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर में इनर लाइन परमिट प्रणाली लागू है। इसके बिना बाहर का कोई व्यक्ति इन राज्यों में नहीं पहुंच सकता। इसके अलावा वह परमिट में लिखी अवधि तक ही वहां रुक सकता है। लेकिन उन राज्यों के लोग बिना किसी रोक के असम में आवाजाही कर सकते हैं।

पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद

असम-मिजोरम सीमा विवाद हो या असम-मेघालय सीमा विवाद। इन दोनों राज्यों और असम के बीच अक्सर झड़प होती रही है। खासकर बीते दो-तीन वर्षों के दौरान इनकी फ्रीक्वेंसी काफी बढ़ गई है। नागालैंड के साथ असम की करीब 512 किलोमीटर लंबी सीमा है। वर्ष 1979 और वर्ष 1985 में हुई दो बड़ी हिंसक घटनाओं में कम-से-कम 100 लोगों की मौत हुई थी। इसी तरह असम और अरुणाचल प्रदेश बीच सीमा पर सबसे पहले वर्ष 1992 में हिंसक झड़प हुई थी। उसी समय से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अवैध अतिक्रमण और हिंसा भड़काने के आरोप लगाते रहते हैं। असम और मेघालय सीमा पर भी अक्सर हिंसक झड़पों की खबरें आती रहती हैं।