असम NRC से 'अयोग्य लोगों को हटाए जाने' के आदेश के खिलाफ एनआरसी के दो स्टेकहोल्डरों ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिकाएं डालने का फैसला किया है। राज्य में एनआरसी के कोऑर्डिनेटर हितेश देव सरमा ने फाइनल लिस्ट से अयोग्य लोगों के नाम हटाए जाने का आदेश दिया था। 

AAMSU के अध्यक्ष रिज़ाउल करीम सरकार ने कहा कि 'हमने इस महीने के अंत तक इस फैसले को चुनौती देते हुए नई याचिकाएं दाखिल करने का फैसला किया है, जोकि एक तरह से पिछले साल जारी हो चुके फाइनल लिस्ट वाले एनआरसी को खोलने की कोशिश करेगा। हमारी नज़र में वो (सरमा) ऐसा आदेश नहीं दे सकते क्योंकि एनआरसी कोऑर्डिनेटर के तौर पर उनकी नियुक्ति को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और अभी यह मामला कोर्ट में है।' सूत्रों ने बताया कि जमीयत उलैमा-ए-हिंद नाम के दूसरे संगठन ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।

हितेश देव सरमा ने इस महीने असम के 33 जिलों में काम कर रहे डिप्टी कमिश्नरों और डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार्स ऑफ सिटिजन रजिस्ट्रेशन (DRCR) को इस संबंध में चिट्ठियां लिखी थीं। उन्होंने लिखा था कि 'आपकी तरफ से मिले रिपोर्ट के मुताबिक, लिस्ट में DF (घोषित विदेशी) / DV (संदिग्ध मतदाता) / PFT (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में अटके पड़े नाम) और उनके वंशजों सहित बहुत से अयोग्य नाम भी आ गए हैं।' 

पिछले साल अगस्त में जो फाइनल लिस्ट जारी की गई थी, उसमें 3.3 करोड़ आवेदकों में से 19.22 लाख लोगों को बाहर कर दिया गया था। एनआरसी के नियमों में अधिकारियों को यह अधिकार था कि वो लिस्ट जारी होने से पहले गलती से लिस्ट में आ गए, या बाहर कर दिए गए नामों को वेरिफाई कर लें। आखिरी लिस्ट 31 अगस्त, 2019 को पब्लिश की गई थी। उसके दो हफ्तों बाद एक ऑनलाइन लिस्ट पब्लिश की गई। हालांकि, इस साल फरवरी में एनआरसी अधिकारियों ने एनआरसी की फाइनल लिस्ट में 'अयोग्य श्रेणी के नामों' को वेरिफाइ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।