असम और मेघालय ने मंगलवार को पिछले 50 सालों से चले आ रहे विवाद को हल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में यहां असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने असम और मेघालय राज्यों के बीच अंतरराज्यीय सीमा विवाद के कुल 12 क्षेत्रों में से छह क्षेत्रों के विवाद के निपटारे के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका मतलब यह हुआ कि दोनों राज्यों के बीच सारे मसले हल हो गए हैं। दोनों के बीच अभी भी 6 मुद्दों पर विवाद जारी है। जिसे दोनों राज्यों की सरकारें आने वाले दिनों में हल करने का प्रयास करेंगी। बता दें कि इस ऐतिहासिक मौके पर इस दौरान दोनों राज्यों के सचिव और गृह मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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गौर हो कि साल 1972 में मेघालयल को असम से अलग करके एक नया राज्य बनाया गया था। दोनों राज्य 884.9 किमी. की लंबी सीमा को साझा करते हैं। इस हिस्से में 12 क्षेत्रों से जुड़ा विवाद शुरू हो गया था। इन 12 में ताराबारी, गिज़ांग, हाहिम, बोकलापारा, खानापारा-पिल्लंगकाटा, रातचेरा , लंगपीह, बोरदुआर, नोंगवा, मातमूर, देशदमोरिया ब्लॉक I और ब्लॉक II, खंडुली और ररेटाचेरा शामिल हैं। जिसमें ताराबारी, गिज़ांग, हाहिम, बोकलापारा, खानापारा-पिल्लंगकाटा और रातचेरा को लेकर समझौता किया है।

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समझौते का उद्देश्य छह ‘मतभेदों वाले क्षेत्रों’ में तमाम मतभेदों को हल करना है, जिसमें कुल सीमा का लगभग 70 प्रतिशत शामिल है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पिछले छह महीनों में कई बैठकें की हैं, जिसमें पहले 12 में से 6 क्षेत्रों में अंतर करने का निर्णय लिया गया था, यानी ताराबारी, गिज़ांग, हाहिम, बोकलापारा, खानापारा-पिल्लंगकाटा और रातचेरा को लेकर समझौता किया है। कैबिनेट मंत्रियों की अध्यक्षता वाली क्षेत्रीय समितियों ने इन छह क्षेत्रों का दौरा किया और असम की अपनी समकक्ष क्षेत्रीय समितियों के साथ संयुक्त निरीक्षण किया।