गुवाहाटी। एक और आतंकी संगठन कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (KLO), जो कभी असम और पश्चिम बंगाल में सक्रिय था, ने असम सरकार (Assam government) के समक्ष शांति का प्रस्ताव रखा है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

असम सरकार (Assam government) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने केएलओ (KLO) के प्रस्तावों के विवरण का खुलासा करने से इनकार करते हुए संकेत दिया है कि संगठन, जो म्यांमार से संचालित होता है, ने हाल ही में शांति वार्ता शुरू करने के इच्छुक लोगों को सरकार के पास भेजा है।

नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, मामला अभी शुरुआती चरण में है। असम सरकार केएलओ के शांति प्रस्तावों को लेकर केंद्र के संपर्क में है।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सुरक्षा बलों ने यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट, नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) और केएलओ सहित पूर्वोत्तर भारत के आतंकी संगठनों के खिलाफ आतंकवाद रोधी अभियान शुरू करने के बाद, इन संगठनों के अधिकांश कैडरों ने पड़ोसी म्यांमार में शरण ली है।

अधिकारी ने कहा, उल्फा-आई ने पिछले महीने अपने एकतरफा युद्धविराम को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया था, वहीं केएलओ का शांति प्रस्ताव एक बहुत ही सकारात्मक विकास है।

केएलओ के प्रस्ताव के बारे में, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया था, इस क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के भारत सरकार के प्रयासों को जारी रखते हुए, मैं राजनीतिक संवाद के माध्यम से सभी मुद्दों को हल करने के लिए केएलओ नेतृत्व की मुख्यधारा में जल्द से जल्द शामिल होने की इच्छा का स्वागत करता हूं। असम सरकार इस सद्भावना उपाय का पूरी तरह से जवाब देगी।

उल्फा-आई और केएलओ के अलावा, नागालैंड, मणिपुर और मेघालय में कई अन्य चरमपंथी संगठन शांति मोड में हैं।

केएलओ, जो 1995 में अस्तित्व में आया था, पश्चिम बंगाल के छह जिलों - कूच बिहार (या कोच बिहार), दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के साथ ही पश्चिमी असम के निकटवर्ती चार जिलों - कोकराझार, बोंगाईगांव, धुबरी और गोलपारा - को मिलाकर एक अलग कामतापुर राज्य बनाने की मांग कर रहा है।