असम में बोड़ोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) की चुनावी माहौल के बीच राज्य की सत्ताधारी सहयोगी पार्टी बीपीएफ से नाता तोड़ने की अटकलों पर एक बार फिर विराम नहीं लग पाया। इस मुद्दे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा के साथ असम के मुख्यमंत्री सर्वान॑द सोनोवाल, मंत्री हिमंत विश्व शर्मा, राज्य के पार्टी अध्यक्ष रंजीत दास, दिलीप सइकिया, फर्णीद्रनाथ तथा अन्य लोगों की अहम बैठक में इस बारे में कोई ठोस फैसला नहीं हो सका।

शुक्रवार को जेपी नड्ढा के घर पर देर शाम तक चली कई घंटे की बैठक के बाद मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि आज हम लोगों की तरफ से राज्य की वर्तमान घटनाओं के बारे में पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्ढा से बात हुई है। उन्होंने कहा कि असम में जो भी विकास के कार्य हुए हैं, वह भाजपा सरकार में हुआ है। उन्होंने कहा कि जितने कम समय में भाजपा सरकार ने विकास के कार्य किए हैं, उतना कांग्रेस के पूरे कार्यकाल में भी नहीं हुआ। यह बात राज्य की जनता जान चुकी है।

उन्होंने खुद राज्य के विकास को देखा है। प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य की अगली सरकार एक बार फिर से भाजपा की ही बनेगी। जनता ने यह मन बना लिया है।

हालांकि उन्होंने बीपीएफ पार्टी से नाता तोड़ने की अटकलों पर कुछ भी नहीं कहा। लेकिन उन्होंने इशारा जरूर किया कि आने वाले समय में अभी और भी राजनीतिक बैठकें होंगी। जिसमें राज्य की सहयोगी पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने की संभावना पर बात हो सकती है।

वहीं, जेपी नड्डा संग चली अहम बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत दास ने हिमंत विश्व शर्मा के बयानों से उलट सहयोगी पार्टियों के साथ चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने सहयोगी पार्टी अगप, बीपीएफ का नाम लेते हुए कहा कि हम वर्तमान में राज्य की सरकार में सहयोगी पार्टियां हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है, इसलिए क्षेत्रीय दलों के साथ समझौतों पर राष्ट्रीय नेता ही अंतिम फैसला लेंगे।

असम में 40 सदस्यीय बोड़ोलैंड क्षेत्रीय रिषद (बीटीसी) के दो चरणों में चुनाव होने हैं। चुनाव की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री सोनोवाल के नेतृत्व में कई राजनेताओं की जेपी नड्ढा संग यह पहली बैठक हुई है।

मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक राज्य में दिसंबर में होने जा रहे बीटीसी चुनावों के बारे में सभी राजनीतिक पहलुओं पर अहम चर्चा हुई है।

गौरतलब है कि असम में मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। नागरिकता कानून, एनआरसी जैसे मुद्दों को लेकर राज्य में भाजपा सरकार का विरोध होता रहा है। बिहार जीत के बाद भाजपा की नजर अब पश्चिम बंगाल और असम में एक बार फिरसे बहुमत की सरकार बनाने पर जोर है। यही वजह है कि हाल ही में असम समेत कई राज्यों में राज्य के नए चुनाव प्रभारी नियुक्त किये गए हैं। इन सभी नवनियुक्त चुनाव प्रभारियों से शुक्रवार को जेपी नड्डा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बेठठक की और राज्य में चुनावी अभियान तेज करने पर जोर दिया है।