एएमयू में असम को देश से अलग करने का बयान देने वाले जेएनयू के छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिका को मंगलवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका पर कोर्ट में लंबी बहस हुई थी। अदालत ने शरजील का आपराधिक इतिहास भी तलब किया था। सारे तथ्यों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और अपील निरस्त कर दी। 

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर 16 जनवरी 2020 को एएमयू में धरना आयोजित हुआ था। इसमें जेएनयू के छात्र शरजील इमाम ने भाषण देते हुए देश को बांटने की बात कही थी। वीडियो वायरल होने पर 26 जनवरी को अलीगढ़ के सिविल लाइन थाने में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया। दिल्ली और असम में भी मुकदमे दर्ज हुए। 

दिल्ली पुलिस ने 28 जनवरी को शरजील इमाम को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया था। शरजील फिलहाल तिहाड़ जेल में है। मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आले नबी ने बताया कि मंगलवार को जिला सत्र न्यायालय की कोर्ट में करीब 20 मिनट बहस हुई। दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी है। अब जल्द ही प्रयागराज हाईकोर्ट में शरजील की जमानत के लिए अपील दायर की जाएगी।