नई दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए किसान अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। असम के अल्पसंख्यक वाला जिला बरपेटा स्थित कलगाछिया का क्षेत्र भी संविधान से जुड़ जाएगा। हालांकि, यह अलग तरीके से जुड़ेगा। इस गणतंत्र दिवस पर गुवाहाटी से 120 किमी दूर कलगाछिया को असम का चौथा संविधान सेवा केंद्र (एसएसके) या संविधान केंद्र मिल जाएगा।

एनआरसी की कवायद और डेढ़ साल बाद राज्य में एक जमीनी आंदोलन विधानसभा चुनाव से महीनों पहले उन लोगों के लिए संविधान को सुलभ बना रहा है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। बता दें कि असम की नागरिकता मामले में बंगाली मूल के गरीब और हाशिए पर आ चुके मुस्लिम (मियां) पकड़े गए थे। इसके बाद दिसंबर 2020 में समुदाय के सदस्यों, लोकल ग्रुप और वकीलों ने एसएसके की तीन जिलों में स्थापना की थी। पहला बरपेटा के टीएनडी बाजार में पिछले साल ही स्थापना हुई थी। जनवरी में सोनटोली (कामरूप) और जोरहाट में एसएसके की स्थापना की गई।

एसएसके एक असंबद्ध इमारत से काम करता है। यह लोगों को असम की नागरिकता के लिए मदद करता है। यह आधार सेवा केंद्र की सहायता भी करता है। एसएसके संदिग्ध मतदाताओं (D वोटर्स), संदिग्ध विदेशी और घोषित विदेशी को नजरबंदी केंद्रों में चिह्नित करते हुए कानूनी सहायता केंद्र और सामुदायिक स्थान उपलब्ध कराता है। मानवाधिकार वकील अमन वदूद ने कहा कि हमारा काम लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कानूनी सहायता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि असम का जोरहाट सीएए का विरोध केंद्र रहा है। इसके बावजूद भी यहां 20 जनवरी को एसएसके का उद्घाटन किया गया।

वकील अमन वदूद ने कहा कि मैंने सामाजिक कार्यों के दौरान बहुत गरीब और डी वोटरों को चिह्नित किया। संविधान के अधिकारों के प्रति अनजान इन लोगों से जब मिलने जाते हैं तो वह लोग भाग जाते हैं। उन्होंने कहा कि एसएसके हॉस्पिटल के इंमरजेंसी की तरह काम करेगा। एसएसके 24 घंटे काम करेगा। वहीं, जोरहाट के निवासी 58 वर्षीय तौफीकुल हुसैन ने बताया कि 149 साल पुरानी एक मस्जिद से एसएसके का संचालन किया जा रहा है।