असम मंत्रिमंडल (Assam Cabinet) ने गुरुवार को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), आदिवासी (tribals) और अन्य पारंपरिक वनवासी समुदाय को सरकारी नौकरी (Government Job) पाने के लिए दो बच्चों वाले नियम (rule of two children) से छूट प्रदान की।  एक सरकारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा (CM Himanta Biswa Sarma) की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने इन समुदायों को असम लोक सेवा (सीधी भर्ती में छोटे परिवार के मानदंड का अनुपालन) नियम, 2019 के दायरे से छूट प्रदान की। 

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आदिवासी और अन्य पारंपरिक वनवासी समुदायों को दो बच्चों के मानदंड से छूट देने का फैसला किया है ताकि सरकारी सेवाओं में आने के लिए उनके लिए बाधा को दूर किया जा सके।

हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि असम सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण नीति को बदलने के लिए क्या कदम उठाए हैं, जिसकी सरमा और उनके सहयोगियों द्वारा नियमित रूप से वकालत की जा रही थी। 19 जून को, सरमा ने कहा था कि असम सरकार विशिष्ट राज्य योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए दो बच्चों की नीति लागू करेगी।

असम पंचायत अधिनियम, 1994 में 2018 में हुए एक संशोधन के अनुसार, ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) में चुनाव लड़ने के लिए वर्तमान में असम में दो बच्चों का मानदंड है, साथ ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और स्वच्छता के लिए शौचालय का इस्तेमाल जरूरी है।

इस बीच, मंत्रिमंडल ने राज्य की करीब 11 लाख महिलाओं का सूक्ष्म ऋण माफ करने के लिए 1800 करोड़ रुपये और सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान पेपर मिल्स (एचपीसी) की बंद पड़ी दो इकाइयों की परिसंपत्ति अधिग्रहित करने के लिए 700 करोड़ रुपये मंजूर किए।

सरमा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को बताया, ‘पहले चरण में हम उन महिलाओं के बारे में विचार कर रहे हैं जिन्होंने नियमित आधार पर किस्त अदा की है। इससे 11 लाख महिलाओं के 25 हजार रुपये तक के कर्ज माफ होंगे।’

सरमा ने कहा कि चेक वितरण का कार्य एक दिसंबर से शुरू होगा और अन्य श्रेणियों में ऋण लेने वालों को लाभ देने पर बाद में विचार किया जाएगा। असम मंत्रिमंडल की बैठक पहली बार गुवाहाटी से 460 किलोमीटर दूर धेमाजी में बुलाई गई थी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जून तक 14 लाख लोगों ने सूक्ष्म कर्ज लिए थे और 12 हजार करोड़ रुपये के क्रेडिट फोर्टफोलियों में से राज्य सरकार को इसपर 7,200 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

राज्य सरकार ने इस साल 24 अगस्त को असम सूक्ष्म वित्तीय प्रोत्साहन और राहत योजना-2021 के लिए 38 सूक्ष्म ऋण कंपनियों और बैंकों से 12 हजार करोड़ रुपये के लिए करार किया था जिससे लाखों महिला कर्जदाताओं को लाभ होगा। सरमा ने कहा कि 700 करोड़ रुपये पेपर मिल के लिए मंजूर किए गए हैं जबकि 1800 करोड़ रुपये की राशि सूक्ष्म ऋण की पहली किस्त भरने के लिए है।

उन्होंने कहा, ‘मंत्रिमंडल ने दो पेपर मिलों के लिए 700 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। इनमें से 570 करोड़ रुपये की राशि कर्मचारियों की देनदारी के लिए होगी जबकि बाकी राशि का इस्तेमाल बिजली बिल भरने और तरलता (नकदी) उपलब्ध कराने के भुगतान में व्यय होगा।’

सरमा ने कहा कि औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद एसपीसी की जगीरोड स्थित पंचग्राम और नगांव मिल की 470 एकड़ जमीन असम सरकार को स्थानांतरित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने धेमाजी जिले की विभिन्न परियोजनाओं के लिए 433 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इनमें से 183 करोड़ रुपये जोनाई-माजुली तटबंध सह सड़क परियोजना पर व्यय किए जाएंगे जबकि 150 करोड़ रुपये जिले में बाढ़ नियत्रंण के लिए आवंटित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 50 करोड़ रुपये जिले में खेल संकुल और एकीकृत जिलाधिकार कार्यालय के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल ने धेमाजी जिले में चिकित्सा महाविद्यालय बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण करने की भी मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र जारी करने में समस्या आ रही है जो इस समय ओबीसी बोर्ड द्वारा जारी किए जाते हैं। इसलिए मंत्रिमंडल ने संबंधित समुदाय के बोर्ड और पदाधिकारियों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत करने का फैसला किया।

सरमा ने कहा, ‘सदोउ असोम मटक सनमिलानी को आज मटक लोगों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत किया गया। धीरे-धीरे अन्य ओबीसी समुदायों के लिए भी यह किया जाएगा। सरमा ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक हर सप्ताह होती है और अब से हर महीने एक बैठक गुवाहाटी से बाहर होगी ताकि उस जिले की समस्याओं को समझा जा सके। उन्होंने कहा, ‘यह रस्मी नहीं है बल्कि लोगों से जुड़ने के लिए है। उन्होंने कहा कि नवंबर के पहले सप्ताह में बोंगाईगांव में कैबिनेट बैठक होगी, जबकि दिसंबर में अगली बैठक हाफलोंग में होगी।

सरकार ने चरिकोरिया-ढाकुआखाना और मुकोकसेलेंग-जोनाई और ताई-अहोम में आदिवासी बेल्ट को भी गैर-अधिसूचित करने का निर्णय लिया। चुटिया, कोच-राजबोंगशी और गोरखाओं के पास वहां भूमि अधिकार होंगे, बशर्ते वे 2011 से पहले बस गए हों।