सिलचर से सांसद डॉ. राजदीप रॉय (Silchar MP Dr. Rajdeep Roy) ने पिछले महीने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के अनुरोध पर व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSO) की अपनी पूरी टीम को सरेंडर कर दिया। सरमा ने पिछले साल 25 दिसंबर को भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों से पीएसओ रखने की "कांग्रेस पार्टी की संस्कृति" को छोड़ने की अपील की थी। रविवार को कछार जिले के पुलिस अधीक्षक रमनदीप कौर को लिखे पत्र में रॉय ने अपने व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों को छोड़ने की इच्छा व्यक्त की।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा, "असम सरकार और असम पुलिस के प्रति गहरी सराहना के साथ मैं अपने पूरे सुरक्षा कर्मियों (पीएसओ, एस्कॉर्ट और हाउस गार्ड) को तत्काल प्रभाव से छोड़ना चाहता हूं। मैं असम पुलिस के उन सभी कर्मचारियों के प्रति अपना व्यक्तिगत आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिन्होंने पिछले तीन वर्षों से सम्मान और गरिमा के साथ मेरी सेवा की है।" उन्होंने कहा, "असम में चार हजार से अधिक पुलिस अधिकारी पीएसओ के रूप में काम कर रहे हैं और उनमें से आधे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ हैं। हम रूढ़ियों को तोड़ रहे हैं और एक नए असम की ओर बढ़ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि ये अधिकारी मजबूत कानून व्यवस्था के साथ एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देंगे।"

रॉय ने यह भी बताया कि उन्होंने कभी भी किसी निजी काम के लिए पीएसओ का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा, "मैंने अपने पीएसओ को कभी भी अपने या अपने परिवार के लिए खरीदारी करने और चीजें खरीदने के लिए नहीं कहा। हमारी लोगों का सम्मान करने की संस्कृति है और हम उसी की एक मजबूत विरासत छोड़ रहे हैं।" गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 97 वीं जयंती समारोह के अवसर पर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम में निर्वाचित प्रतिनिधियों से पीएसओ को छोड़ने का उदाहरण स्थापित करने का आग्रह किया था। इसका जवाब देते हुए भाजपा के कई नेताओं ने इस सर्विस को छोड़ दिया। 

सरमा ने पीएसओ को छोड़ने के लिए राजदीप रॉय की प्रशंसा की। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "वास्तव में एक यह एक उत्साही और सच्चे भाजपा कार्यकर्ता का महान उदाहरण। आपका हृदय से आभार डॉ. राजदीप रॉय।" सरमा, जिनके पास असम का गृह विभाग भी है, ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य सरकार सरकारी खर्च को कम करने के लिए राजनेताओं व अन्य अधिकारियों के पीएसओ को 50 प्रतिशत तक कम करने की योजना बना रही है।

उन्होंने कहा, "हमने विभिन्न व्यक्तियों के लिए पीएसओ की आवश्यकता की जांच के लिए एक सुरक्षा समीक्षा समिति का गठन किया है। हम पीएसओ की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी करना चाहते हैं। राज्य सरकार के मुख्य सचिव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, उपायुक्त, अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे संवैधानिक पदों पर रहने वालों को छोड़कर।" सीएम के मुताबिक असम में तैनात 4240 पीएसओ में से 2,526 विभिन्न पार्टियों के चुने हुए प्रतिनिधियों को सेवा दे रहे हैं। 854 सेवारत या सेवानिवृत्त सिविल अधिकारियों के साथ हैं और 546 न्यायिक अधिकारियों के साथ हैं।

हालांकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने इस "कम महत्व वाले मुद्दे" पर ध्यान देने को लेकर हिमंत बिस्वा सरमा की आलोचना की है। कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा, "यह चर्चा के लिए तुलनात्मक रूप से कम महत्वपूर्ण मुद्दा है। मुख्यमंत्री बड़ी चर्चाओं से बचने के लिए ऐसे विषयों को उजागर करना पसंद करते हैं।" हैलाकांडी से एआईयूडीएफ विधायक निजाम उद्दीन चौधरी ने कहा कि वह अधिक पीएसओ की मांग करेंगे क्योंकि उन्हें गुवाहाटी जाने के दौरान मेघालय से यात्रा करनी होगी।

उन्होंने कहा, "असम विधानसभा में सत्र में भाग लेने के दौरान हमें मेघालय की यात्रा करनी पड़ती है। यात्रा के दौरान बराक घाटी के लोगों को मेघालय में कई बार हमलों का सामना करना पड़ा है। मैं इस स्थिति में जोखिम कैसे उठा सकता हूं।" चौधरी ने असम के सीएम से अपील की कि पहले अपनी निजी सुरक्षा सरेंडर करें। उन्होंने कहा, "केवल अगर हिमंत बिस्वा सरमा अपनी पूरी सुरक्षा आत्मसमर्पण कर देते हैं, तो मैं उनको फॉलो करने के बारे में सोच सकता हूं।"