असम-मेघालय सीमावर्ती 12 विवादित (Assam-Meghalaya border dispute) इलाकों में से छह इलाकों के विवाद का निपटारा करने के लिए राज्य सरकार ने मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक (all party meeting) में एक प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव के अनुसार उक्त छह इलाकों की कुल विवादित  भूमि और गांवों की 50 प्रतिशत भूमि मेघालय में और 50 प्रतिशत भूमि असम में शामिल किए जाने की बात  कही गई है। इसके अलावा कई विवादित इलाकों के गांव मेघालय को सौंपने और कई गांव असम के पास रखने का भी भी निर्णय लिया गया है। 

प्रदेश कांग्रेस ने हिमंता सरकार (Himanta government) के इस प्रस्ताव के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया है। कांग्रेस ने कहा कि राज्य के सीमा विवाद संबंधी कोई भी निर्णय लेने से पूर्व विधानसभा का अधिवेशन बुलाया जाना चहिए। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया (Debabrata Saikia) ने अपने तीन विधायक के साथ सर्वदलीय बैठक में भाग लिया। सैकिया ने इस मामले को बेहद गंभीर बताया है। साथ ही कहा कि मेघालय के साथ ही अन्य पड़ोसी राज्यों के सीमा विवाद का भी मामला जुड़ा है। 

उन्होंने ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आज लिया गया फैसला भविष्य में लिए जाने वाले फेसलों पर कोई प्रभाव न डाल सके। सैकिया ने आगे कहा कि भारतीय संविधान की 131 नंबर धारा के अनुसार दो राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विवाद होने पर उच्चतम न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा विवाद को सुलझाने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया कदम सही है या नहीं यह जानना भी जरूरी है।