असम में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिमों के लिए म्यूजियम मुद्दे पर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। विधान सभा की एक समिति की सिफारिश के बावजूद असम सरकार इसका विरोध कर रही है।

कांग्रेस के एक विधायक शरमन अली अहमद ने हाल में असम सरकार को राज्य के चर-चापोरी यानी नदी के द्वीपों और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले बंगाली मुसलमानों के लिए गुवाहाटी में प्रसिद्ध श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में म्यूजियम स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन सरकार ने विधायक की मांग को खारिज कर दिया है। 

उसके बाद इस मुद्दे पर बहस तेज हो रही है। दरअसल यह विवाद राज्य के ताकतवर मंत्री और बीजेपी के शीर्ष नेता हिमंत बिस्वा सरमा के उस ट्वीट के बाद तेज हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य के चर यानी तटवर्ती इलाके में रहने वालों की कोई अलग पहचान और संस्कृति नहीं है।

राज्य में तटवर्ती इलाके में रहने वाले मुस्लिमों को मियां कहा जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इस म्यूजियम की स्थापना का प्रस्ताव सबसे पहले बीजेपी सदस्यों वाली एक समिति ने ही दिया था। इससे पहले बीते साल भी बांग्ला मूल के कवियों की लिखी कविताओं को मियां कविता कहने पर विवाद हुआ था। असम में लगभग एक करोड़ की मुस्लिम आबादी में बंगाली मुस्लिमों की तादाद करीब 64 लाख है।

दरअसल, यह पूरा विवाद कांग्रेस विधायक शर्मन अली अहमद के उस पत्र से शुरू हुआ जो उन्होंने म्यूजियम निदेशक को लिखा था। इसमें कहा गया था कि तटवर्ती इलाकों की विरासत व संस्कृति को दर्शाने वाले प्रस्तावित म्यूजियम की स्थापना शीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में की जानी चाहिए। लेकिन इसके जवाब में मंत्री हिमंत ने अपने ट्वीट में कहा, "हमारी सरकार राज्य में मुस्लिमों की विरासत पेश करने वाले मियां म्यूजियम बनाने की अनुमति नहीं देगी।

मेरी समझ में असम के चार अंचल में कोई अलग पहचान और संस्कृति नहीं है, क्योंकि वहां के ज्यादातर लोग बांग्लादेश के प्रवासी हैं। श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र असमिया संस्कृति का प्रतीक है और हम इसमें कोई विकृति नहीं आने देंगे। माफ कीजिएगा विधायक साहब।”

सरमा के इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया। इसका जवाब देते हुए असम से कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने ट्वीट किया, "माफ कीजिएगा हेमंत जी, इन लोगों के पूर्वज तत्कालीन बंगाल से आए थे, जो कि अखंड भारत का अहम हिस्सा था। कृपया सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए इतिहास से छेड़छाड़ मत कीजिए।” विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पत्रकारों से कहा, "श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र की स्थापना संत विद्वान श्रीमंत शंकरदेव के आदर्शों के अनुरूप की गई है और राज्य सरकार उसे बरकरार रखने के लिए कृतसंकल्प है।”

दूसरी ओर, हेमंत बिस्वा सरमा ने अपने रुख में कोई भी नरमी नहीं दिखाई है। विधायी समिति की म्यूजियम बनाने की सिफारिशों के बारे में एक सवाल पर उनका कहना था, "जिस भी समिति ने जो भी रिपोर्ट दी है, वह सिर्फ फाइलों में ही रहेगी। असम सरकार का रुख साफ है, कलाक्षेत्र में कोई भी मियां म्यूजियम नहीं बनेगा।”