असम में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार ने लापरवाही को छिपाने की कोशिश में लंदन ओलंपिक में मशाल उठाने वाली पिंकी कर्माकर को अस्थायी नौकरी की पेशकश की है। वित्तीय कठिनाई से जूझ रही कर्माकर को दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करना पड़ रहा था। कर्माकर को केवल तीन महीनों के लिए असम टी एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन में 9,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर अस्थायी नियुक्ति दी गई है।

हालांकि, असम सरकार की ओर से जारी इससे जुड़े पत्र से कर्माकर निराश हैं क्योंकि इसमें लिखा है कि उनकी सेवाओं को कभी भी बिना कोई कारण बताए समाप्त किया जा सकता है और वह इस संगठन में बाद में नियुक्ति का कोई दावा नहीं कर सकेंगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में कर्माकर की मुश्किलों के बारे में जानकारी सामने के बाद राज्य सरकार की काफी निंदा हुई थी। यह तब हुआ है जब हाल ही में असम सरकार से राज्य की बॉक्सर लवलीना बोरोगोहन को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने पर पुलिस अधिकारी के पद के साथ ही 1 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की है।

असम सरकार की कथित अनदेखी को छिपाने के लिए राज्य के श्रम मंत्री संजॉय किशन ने स्वतंत्रता दिवस पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कर्माकर को नियुक्ति का पत्र सौंपा था। इसके साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया था कि राज्य सरकार जल्द ही उनके लिए एक स्थायी नौकरी की व्यवस्था करेगी।