कोविड -19 संकट के बीच असम में अगर अगले महीने से स्कूल खुल भी जाएं, फिर भी कई माता-पिता अपने बच्चों को स्कूलों में नहीं भेजना चाहते हैं। अभिभावकों के एक समूह ने यह बात कही। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक नवंबर से छठी कक्षा से ऊपर के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने पर विचार किये जाने की संभावना है। 

हालांकि, इसके लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। शिक्षकों के साथ कुछ अभिभावकों ने सुझाव दिया कि स्कूल को पूरे साल बंद रखना चाहिए और सरकार को 2020 को ‘कोविड-19 वर्ष’ घोषित करना चाहिए। केंद्र सरकार के नवीनतम मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 15 अक्टूबर से श्रेणीबद्ध तरीके से स्कूलों को फिर से खोलने पर निर्णय लेने की अनुमति दी है। कई स्कूल प्राधिकारियों का मानना है कि सरकार का शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलने का निर्णय संक्रमण की बढ़ती संख्या और बढ़ते मृत्यु दर को देखते हुए "थोड़ा जल्दी" होगा। 

पहले ही नौवीं कक्षा से 12वीं कक्षा के छात्रों को उनके माता-पिता की लिखित सहमति के साथ स्वैच्छिक आधार पर स्कूल जाने की अनुमति दी गई है। असम के पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार झा ने पीटीआई-भाषा से कहा, "जब तक कोई टीका नहीं आ जाती या स्थिति नहीं सुधर जाती तब तक मैं अपनी बेटी को स्कूल नहीं भेजूंगा।’’ झा ने कहा, ‘‘शैक्षणिक वर्ष का बर्बाद चला जाना स्कूली बच्चों के लिए एक बड़ा मुद्दा नहीं है। केंद्र सरकार इस संबंध में एक अधिसूचना ला सकती है और इस विशेष वर्ष के नुकसान को देखते हुए नौकरी या सेवानिवृत्ति की आयु में छूट दे सकती है।’’ 

झा की बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती है। इसी तरह की भावना को व्यक्त करते हुए, असम लोक सेवा आयोग के सदस्य संजीब गोहेन बरुआ ने कहा कि त्योहारी सीजन के बाद स्कूलों का खुलना चिंता का विषय है क्योंकि कोविड-19 के मामलों के बढ़ने की आशंका है। बरुआ की बेटी 12वीं कक्षा की छात्रा है। उन्होंने कहा, ‘‘घर पर महीनों रहने के बाद, बच्चे स्वाभाविक रूप से अपने दोस्तों से मिलने के लिए उत्साहित होंगे और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन करने में गलती कर सकते हैं।’’ 

बरुआ ने कोविड-19 मामलों में गिरावट आने तक कुछ और महीनों तक ऑनलाइन पढ़ाई को जारी रखने का समर्थन किया, हालांकि वह इस बात से सहमत हैं कि कक्षा में रहकर पढ़ने के लाभों से इनकार नहीं किया जा सकता है। उनकी बेटी अनुरागिनी गोहेन बरुआ ने कहा कि वह अपने स्कूली जीवन के अंतिम वर्ष की मस्ती को गंवाने से निराश हैं। एसबीओए एजुकेशनल सोसाइटी (एनई सर्कल) के अध्यक्ष सीतानाथ लाहकर ने बताया कि जब सितंबर में असम में स्कूलों की उच्च कक्षाओं और कॉलेजों को आंशिक रूप से फिर से खोला गया, तो कई छात्रों और शिक्षकों के कोविड-19 से संक्रमित होने की सूचना मिली। उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह फिर से नहीं होगा? स्कूलों को खोलने की जल्दीबाजी क्यों है? जबकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने खुद ही कहा है कि असम में स्थिति गंभीर है।’’