पूर्वोत्तर राज्य दुनिया की सारी बहुत लिए हुए लेकिन आतंकी संगठनों ने यहां की खूबसूरती पर कलंक लगा रखा है। इस खूबसूरत को संवारने के लिए असम राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने उग्रवादी संगठनों KLO और ULFA-I से हिंसा से दूर रहने और शांति वार्ता के लिए आने का आग्रह किया है।



असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa) ने कहा कि "मैं दो प्रमुख चरमपंथी समूहों, ULFA-I और कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (KLO) से आगे आने और शांति वार्ता में बैठने का आग्रह करता हूं। "अन्य सभी संगठन या तो सरकार के साथ शांति वार्ता में लगे हुए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं और मुख्यधारा में लौट आए हैं।"

सरमा ने गुवाहाटी में राज्य के दो उग्रवादी संगठनों के 169 कार्यकर्ताओं के समर्पण समारोह में बोलते हुए यह बयान दिया। इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री ने परेश बरुआ के नेतृत्व वाले ULFA-I के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता को 'जटिल मुद्दा' करार दिया था।



सीएम सरमा ने कहा था कि "उल्फा मुद्दा एक जटिल मुद्दा है जो लंबे समय तक बढ़ा है और कई हताहतों का कारण बना है। दोनों पक्षों की मजबूरियां हैं जो इसके समाधान में देरी कर रही हैं, ”। इस बीच, असम के सीएम हिमंता बिस्वा (Himanta Biswa) ने कहा है कि "असम में आदिवासी उग्रवाद का युग समाप्त हो गया है"।

जानकारी दे दें कि असम में दो उग्रवादी संगठनों के कैडरों ने गुवाहाटी में औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण (surrendered) कर दिया। गुवाहाटी में हथियार डालने वाले विद्रोही उग्रवादी संगठनों तिवा लिबरेशन आर्मी (TLA) और यूनाइटेड गोरखा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन ((UGPO) के थे।  गुवाहाटी में 169 आतंकियों ने हथियार डाल दिए।  


सीएम हिमंता सरमा (Himanta Sarma) ने कहा कि“इसके साथ, प्रत्येक आदिवासी समूह मुख्यधारा में शामिल हो गया है। ये जंगल में अंतिम सैनिक थे। आदिवासी उग्रवाद का युग आखिरकार असम में खत्म हो गया है, ”।