असम (Assam) में एक छात्र नेता की पीट-पीट कर हत्या के मामले का मुख्य अभियुक्त सड़क हादसे में मारा गया है। राज्य में बीती मई से अब तक कुल 28 लोगों की पुलिस हिरासत में मौत (Death in police custody) हो चुकी है।केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) ने हाल में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 के बीच पुलिस हिरासत में और मुठभेड़ में होने वाली मौतों के मामले में पूर्वोत्तर राज्यों में असम पहले स्थान पर है। 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने हाल में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वर्ष 2001 से वर्ष 2020 के बीच बीते 20 वर्षों में देश भर में पुलिस हिरासत 1,888 मौतें हुई हैं। लेकिन इन मामलों में अब तक महज 26 पुलिस वालों को ही दोषी ठहराया जा सका है। एनसीआरबी वर्ष 2017 से हिरासत में मौत के मामलों में गिरफ्तार पुलिसकर्मियों का आंकड़ा जारी कर रहा है। बीते चार वर्षों में हिरासत में हुई मौतों के मामलों में 96 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। 

असम में मई से अब तक हिरासत में हुई मौतों के मामले बढ़ने के बाद विपक्ष और गैर-सरकारी संगठनों ने सरकार और पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ताजा मामला ऊपरी असम के जोरहाट जिले में सोमवार को अखिल असम छात्र संघ (आसू) के एक नेता अनिमेश भुइयां की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस मामले में मुख्य अभियुक्त नीरज दास समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया था।