असम में अगले साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा के चुनाव होने हैं। बहुमुखी राजनीतिज्ञ के तौर पर हेमंत बिश्व सरमा उत्तर पूर्व में बीजेपी के प्रमुख संकटमोचक हैं। अगले साल होने वाले चुनाव में बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने के लिए सरमा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। असम में पिछले दो साल से राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) एक मुख्य मुद्दा रहा है। 

हालांकि, सरमा इसे आगामी चुनाव में मुद्दा नहीं मानते। हेमंत बिश्व सरमा कहते हैं, 'बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जीत का सकारात्मक प्रभाव हमें पश्चिम बंगाल और असम के आगामी चुनाव में देखने को मिलेगा। असम में अब राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) मुद्दा नहीं रह गया है। उनका तर्क है कि समस्या असमिया मुसलमान नहीं है, लेकिन असमिया संस्कृति को 'खतरा' जरूर है। बीजेपी को नगा शांति वार्ता से बड़ी उम्मीद है।

हेमंत बिश्व सरमा ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी की रणनीति समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। क्या बिहार चुनाव के नतीजे अगले साल असम में होने वाले विधानसभा चुनाव पर कोई असर डालेंगे? इस सवाल के जवाब में सरमा ने कहा, 'हमें बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम को अलग करके नहीं देखना चाहिए। इसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मणिपुर में उपचुनावों के साथ देखा जाना चाहिए। अगर आप देश के नक्शे को देखते हैं, तो पूर्व से पश्चिम और दक्षिण से उत्तर तक, लोगों ने एक बार फिर से लोकसभा चुनाव में दिए गए फैसले को दोहराया है।'

बिहार चुनावों में AIMIM ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के बारे में बातें की। क्या ये असम विधानसभा चुनावों में मुद्दा बन सकता है, क्योंकि राज्य में बड़ी मुस्लिम आबादी है? इसके जवाब में हेमंत बिश्व सरमा कहते हैं, 'असम में एनआरसी और सीएए अब मुद्दा नहीं रह गए हैं। मुद्दा विकास का है। असमिया मुस्लिम समुदाय हमें वोट देगा, लेकिन अभी तक जितने भी मुसलमान विभिन्न समयों पर बांग्लादेश से पलायन कर चुके हैं, वे बीजेपी को वोट देने नहीं जा रहे हैं। हम अपना विकास कार्य जारी रख रहे हैं, क्योंकि सरकार सभी के लिए है।'