इस्तांबुल। तुर्की के इस्तांबुल में जारी 12वीं आईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के दूसरे प्रतिस्पर्धी दिन मंगलवार को भारत के नाम एक और जीत दर्ज हुई। पहली बार विश्व चैम्पियनशिप में खेल रहीं हरियाणा निवासी नीतू ने 48 किग्रा भार वर्ग के पहले दौर के मुकाबले में रोमानिया की स्टेलयुटा डुटा को एकतरफा अंदाज में 5-0 से हरा दिया। हरियाणा के भिवानी की निवासी नीतू ने इससे पहले, फरवरी में 2022 स्ट्रैंड्जा बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा 21 वर्षीय नीतू 2017 यूथ वल्र्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। नीतू और डुटा ने इस मुकाबले की आक्रामक शुरुआत की। डुटा अधिक आक्रामक दिख रही थीं लेकिन नीतू ने खुद को संयमित बनाए रखते हुए सही समय पर सटीक मुक्के लगाए औऱ पहले राउंड में सभी जजों से पूरे अंक हासिल करने में सफल रहीं। 

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इसके बाद दूसरे और तीसरे राउंड में भी नीतू ने अपना वही प्रदर्शन जारी रखा औऱ विजेता बनकर उभरीं। नीतू के रूप में भारत को दो दिनों में दूसरी जीत मिली है। पहले दिन ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने जीत हासिल की थी। शनिवार को अंतिम-16 दौर के मैच में नीतू का सामना स्पेन की लोपेज डेल अर्बोल मार्टा से होगा। लोपेज ने पहले दौर के मैच में वियतनाम के गुयेन थी थू नी को एकतरफा अंतर से हराया। बुधवार को चार भारतीय खिलाड़ी एक्शन में होंगी। 2019 एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली निकहत जरीन 52 किग्रा भार वर्ग के शुरुआती दौर के मैच में मेक्सिको की हेरेरा अल्वारेज के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेंगी। इसी तरह, मनीषा (57 किग्रा), परवीन (63 किग्रा) और स्वीटी (75 किग्रा) देश की तीन अन्य मुक्केबाज हैं, जो इस प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिता के तीसरे दिन अंतिम- 32 राउंड में अपनी चुनौती की शुरुआत करेंगी। मनीषा को पहले दौर में बाई मिली थी और वह दूसरे दौर में नेपाल की कला थापा से भिड़ेंगी जबकि परवीन और स्वीटी क्रमश: यूक्रेन की मारिया बोवा और इंग्लैंड की केरी डेविस से भिड़ेंगी। 

इससे पहले, प्रतियोगिता के पहले दिन ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने विश्व चैंपियनशिप में दो बार की पदक विजेता चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन के खिलाफ 3-2 से रोमांचक जीत हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय सर्किट में विजयी वापसी की। 2020 टोक्यो ओलंपिक के बाद यह लवलीना का पहला अंतरराष्ट्रीय मैच था। मैच के बाद लवलीना ने कहा, 'ओलंपिक के बाद ये मेरा पहला मैच था। ओलंपिक में बहुत कुछ सीखने को मिला था तो उस सबके ऊपर काम किया था। मुझे देखना था कि ओलंपिक के बाद अपनी कमियों पर काम करने के बाद मैं कहां तक पहुंची हूं और कैसा कर रही हूं। ये मैच थोड़ा टफ था मेरे लिए लेकिन सबके सपोर्ट की वजह से मैं अच्छा कर पाई औऱ अच्छा बाउट दे पाई। मेरा यही कोशिश रहेगा कि आने वाले टाइम में और अच्छा कर पाऊं और इंडिया को गोल्ड दे पाऊं।'

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यह साल खास है क्योंकि 73 देशों के 310 मुक्केबाज इस चैम्पियनशिप में भाग ले रही हैं। यह साल खास इसलिए है क्योंकि यह इस प्रतिष्ठित आयोजन की 20वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। आईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप का पिछला संस्करण 2019 में रूस में आयोजित किया गया था। उस समय भारतीय मुक्केबाजों ने एक रजत और तीन कांस्य पदक जीते थे।भारतीय खिलाड़यिों ने इस प्रतिष्ठित वैश्विक आयोजन के 11 संस्करणों में अब तक नौ स्वर्ण, आठ रजत और 19 कांस्य सहित 36 पदक हासिल किए हैं। रूस (60) और चीन (50) के बाद के नाम सबसे अधिक पदक हैं।