असम-मिजोरम विवाद अब ठंडा पड़ता नजर आ रहा है। इस क्रम में मिजोरम ने असम के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापिस लेने का फैसला लिया है। इस पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आभार जताया है।

ट्विटर पर सरमा ने इस बारे में लिखा है कि-  मुझे पता है कि माननीय मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने मिजोरम पुलिस को हमारे अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने के आदेश दिए हैं। मैं उनके इस सकारात्म कदम का स्वागत करता हूं।

साथ ही सरमा ने ट्विटर पर लिखा है कि- एक शीघ्र सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए वार्ता करने के लिए मैं अपने कैबिनेट सहयोगियों अतुल बोरा और अशोक सिंगल को भेज रहा हूं।

सरमा ने आगे लिखा, "असम अपनी सीमाओं पर शांति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और एक शांतिपूर्ण और विकसित उत्तर-पूर्व का मार्ग प्रशस्त करता है।"

गौरलतब है कि पिछले सप्ताह असम-मिजोरम सीमा पर भड़की हिंसा के बाद मिजोरम के कोलासिब जिले के वैरेंगटे पुलिस स्टेशन में "हत्या के प्रयास" सहित भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में असम के एक महानिरीक्षक, एक उप महानिरीक्षक, एक पुलिस अधीक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

इस प्राथमिकी में कछार जिला उपायुक्त के अलावा लगभग 200 अज्ञात पुलिस कर्मियों को भी शामिल किया गया। इन अधिकारियों को 1 अगस्त को वैरेंगटे पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा गया।

मिजोरम पुलिस ने उसी दिन असम के छह वरिष्ठ अधिकारियों को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया। उसी दिन असम पुलिस ने दो राज्य पुलिसबलों के बीच हुई झड़प के सिलसिले में मिजोरम के अधिकारियों और मिजोरम के राज्यसभा सांसद के वनलालवेना को नई दिल्ली में समन जारी किया।

ये था मामला

बीते सोमवार को असम और मिजोरम के सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें असम के छह जवान शहीद हो गए।

मिजोरम के सीएम जोरमथंगा ने पुलिस और नागरिकों के बीच झड़प का एक वीड‍ियो ट्वीट करते हुए गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए अनुरोध किया था कि इस मामले पर तुरंत कोई कार्रवाई करें। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय को भी टैग किया गया था। 

इसके जवाब में सीएम हिमंता बिस्‍वा शर्मा ने ट्वीट किया, 'माननीय जोरमथंगा जी, कोलासिब (मिजोरम) के एसपी ने हमसे कहा है कि जब तक हम अपनी पोस्ट से पीछे नहीं हट जाते तब तक उनके नागरिक सुनेंगे नहीं और हिंसा नहीं रोकेंगे। ऐसे हालात में सरकार कैसे चला सकते हैं?'

गौरतलब है कि पिछले एक महीने से असम-मिजोरम सीमा पर, विशेष रूप से कछार-कोलासिब जिलों में तनाव बढ़ रहा था, नतीजतन दोनों पक्षों ने यहां सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया। पिछले साल अक्टूबर में, असम के कछार जिले के निवासियों और मिजोरम के कोलासिब जिले के वैरेंगटे गांव के पास के लोगों के बीच हिंसा भड़क उठी, जिसमें आठ लोग घायल हो गए और कई झोपड़ियां व दुकानें जल गईं।

पिछले साल अक्टूबर में हुई घटना से पहले सीमा पर आखिरी बार फरवरी 2018 में हिंसा हुई थी। मिजोरम पुलिस ने कथित तौर पर किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने के लिए जंगल में एक लकड़ी का विश्राम गृह बनाया था। हालांकि, असम पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने यह दावा करते हुए संरचना को नष्ट कर दिया कि इसे असमिया क्षेत्र में बनाया गया था। इसके कारण एमजेडपी और असमकर्मियों के बीच खूनी संघर्ष हुआ, जिसमें मिजोरम के कई पत्रकार भी घायल हुए।

असम के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी जिलों के साथ मिजोरम के तीन जिलों (आइजोल, कोलासिब और ममित) की 164.5 किलोमीटर की सीमा दोनों राज्यों के बीच तनाव का स्रोत रही है। कथित तौर पर विवाद की जड़ें 1875 से हैं, जो लुशाई हिल्स (जिसे अब मिजोरम के रूप में जाना जाता है) को कछार के मैदानों से अलग करती है। 1933 में एक परस्पर विरोधी अधिसूचना जिसमें मणिपुर और लुशाई हिल्स के बीच एक सीमा को निर्दिष्ट किया गया था।

मिजोरम ने दावा किया है कि बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन (बीईएफआर) अधिनियम, 1873 से प्राप्त 1875 अधिसूचना के आधार पर सीमा का सीमांकन किया जाना चाहिए। मिजो समुदाय ने आरोप लगाया है कि 1933 की अधिसूचना का कोई महत्व नहीं है। चूंकि मिजोरम से सलाह नहीं ली गई थी। दूसरी ओर, असम को 1933 के सीमांकन का पालन करने के लिए कहा जाता है।

ताजा हिंसा गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शिलांग में सभी पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करने के कुछ ही दिनों बाद हुई है। बताया जाता है कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्रियों को सीमाओं पर विवादों को सुलझाने का काम सौंपा था।