ऑल असम माइनोरिटीज स्टूडेंट्स यूनियन (AMSU) ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को भेजे ज्ञापन में आरोप लगाया कि असम सरकार (Assam Government) ‘मनमाने, चुनिंदा एवं अवैध निष्कासन’ के नाम पर अल्पसंख्यक समुदायों का उत्पीड़न’ कर रही है।

छात्र संगठन ने कहा है कि निकाले गये लोगों को खुले में रहने को बाध्य किया जा रहा है । उसने प्रधानमंत्री से इन विस्थापित लोगों को जमीन ‘पट्टा’ एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं दिलाकर उनके उपयुक्त पुनर्वास के लिए दखल देने का आह्वान किया।

आमसू (AMSU)ने सितंबर में दर्रांग जिले के गोरूखुटी में निष्कासन अभियान के दौरान ‘गरीब लोगों को उनके वासक्षेत्र से निकालने के लिए क्रूर ताकत’ के इस्तेमाल की निंदा की । इस दौरान दो व्यक्तियों की जान चली गयी थी।

यूनियन ने प्रधानमंत्री (PM) से राष्ट्रीय नागरिक पंजी अद्यतन (NRC) प्रक्रिया को चालू करने और उसे निर्धारित समय सीमा में पूरा करने की भी अपील की।

आमसू सलाहकार अनीउद्दीन अहमद ने बताया कि प्रधानमंत्री (PM) के नाम का यह ज्ञापन नयी दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों को सौंपा गया। उसकी प्रतियां यहां पत्रकारों को उपलब्ध करायी गयीं।

इस ज्ञापन में छात्र संगठन के सदस्यों ने ‘ असम के लोगों खासकर राज्य में रह रहे अल्पसंख्यक समुदायों की शिकायतें’ रखीं हैं तथा उसके समाधान के लिए प्रधानमंत्री के हस्तक्षेत्र की मांग की है।

यूनियन ने दावा किया कि असम सरकार (Assam Government) ‘असल भारतीय नागरिकों को उनके वासस्थानों से हटाकर मनमाने, चुनिंदा एवं अवैध निष्कासन अभियान में लगी है और उनका पुनर्वास नहीं कर रही है।’

गुवाहाटी उच्च न्यायालय (Guwahati High Court) के आदेश पर राज्य सरकार ने होजाई जिले के लुमडिंग आरक्षित वन क्षेत्र में दूसरा निष्कासन अभियान शुरू किया।