जमीयत उलेमा ए हिन्द ने असम के दारांग जिले में हुयी इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना की सख्त अल्फाज में निंदा करते हुये देश के गृहमंत्री और असम के मुख्यमंत्री से इस घटना के मुजरिमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने इस तरह की दुखद घटना पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हुये अपने अधिकारों के लिये संघर्ष कर रहे निहत्थे लोगों पर पुलिस फायरिंग निंदा की है।

इस घटना को लेकर मौलाना मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत कुमार बिस्वासर्मा और देश के गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और ह्यूमन राइट्स वॉच को खत लिखकर उनसे अपने ही देश में प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक व्यवहार न करने का आग्रह किया है। मौलाना मदनी ने कहा कि सभ्य समाज के लिये इस तरह की घटनायें असहनीय है और यह अत्यधिक पागलपन और कट्टरता का प्रदर्शन है, जो मानवता को शर्मसार करता है।

मौलाना मदनी ने इस घटना की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच, वीडियो में शामिल पुलिस अधिकारियों और तथाकथित कैमरामैन के खिलाफ फौरन कार्रवाई किये जाने, पुलिस हिंसा में मारे गये लोगों को उचित मुआवजा दिये जाने मारे गए नागरिकों के विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था कराये जाने की मांग की। मौलाना मदनी ने कहा कि हमारे देश के संविधान में मानवाधिकारों को प्राथमिकता दी गई है, जमीन का कोई टुकड़ा इंसान की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है, इसलिए उम्मीद है कि असम के मुख्यमंत्री मानवीय अधिकारों की तथा शोषित लोगों की रक्षा करेगें।