असम में सरकारी मदरसों को बंद किए जाने की घोषणा पर जमीयत उलमा-ए-हिद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे भाजपा का चुनावी कार्ड बताया है।

तीन दिन पूर्व असम के शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा ने कहा कि पब्लिक के रुपयों से धार्मिक शिक्षा देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए सरकारी मदरसे अब संचालित नहीं होंगे। 

शनिवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि असम सरकार का मकसद मुसलमानों को यह अहसास कराना है कि उनके लिए मजहब पर चलना आसान नहीं है। कहा कि देश मे हजारों मदरसे चल रहे हैं। 

मुस्लिम कौम अपने दीन के मसले में किसी की मोहताज नहीं है। वह अपने दीन पर कायम है और अपने मदरसों और मस्जिदों को जिदा रखे हुए है।