असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि उल्फा-आई की अपने ही कार्यकर्ताओं को खत्म ( प्राणदंड देना)  करने की घटना राज्य के युवाओं के लिए एक सबक के रूप में आई होगी जो विद्रोही संगठन में शामिल होना चाहते हैं।

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सीएम सरमा ने कहा, "यह असम के युवाओं के लिए एक सबक के रूप में काम करना चाहिए जो उल्फा-आई में शामिल होना चाहते हैं।"

शांति की अपील करते हुए, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उल्फा-आई से 'रक्तपात' को रोकने और बातचीत की मेज पर आने को कहा है।

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असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, मैं एक बार फिर उल्फा-आई से बातचीत की मेज पर आने का आग्रह करता हूं, विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक खून खराबा नहीं रुक जाता। 

इस बीच जब उल्फा-आई ने अपने दो कैडरों को जासूस होने के आरोप में 'निष्पादित' करने के लिए कहा, तो असम पुलिस प्रमुख भास्कर ज्योति महंत ने कहा कि पुलिस विभाग का दोनों लड़कों के साथ कोई संबंध नहीं था।

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उल्फा-I के दावों को खारिज करते हुए, डीजीपी ने कहा, “क्या कभी किसी ने असम पुलिस के जासूसों को कहीं भेजने के बारे में सुना है? यह निराधार आरोप है।" महंत ने आगे कहा कि दो असमिया युवाओं की हत्या एक शर्मनाक और कायरतापूर्ण कार्य था।