पार्टी लाइन से अलग हटकर असम के विधायकों ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य के शिक्षा क्षेत्र की खराब स्थिति़ पर प्रकाश डाला। चालू वित्त वर्ष के बजट पर चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन और विपक्षी दलों के विधायकों ने सरकार से कहा कि अगर असम शिक्षा क्षेत्र में देश के टॉप पांच राज्यों में से एक बनने के अपने टारगेट को पूरा करना चाहता है तो इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

राज्य में बीजेपी अपने सहयोगी दलों असम गण परिषद (एजीपी) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के साथ सरकार का नेतृत्व कर रही है। चर्चा का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री रानुज पेगू ने कहा कि ट्रेंड टीचर्स की कमी के कारण राज्य में विशेषकर माध्यमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता चरमरा रही है। शिक्षा मंत्री पेगू ने कहा कि राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में केवल 38 प्रतिशत टीचर्स ही ट्रेंड हैं।

साथ ही कहा कि 2,500 निचले प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों को ‘उत्कृष्टता केंद्रों’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि 75 साल से अधिक पुराने 209 स्कूलों में से प्रत्येक को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 3 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा मंत्री ने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर टीचर्स के 22,921 खाली पदों को भी भरा जाएगा।

इससे पहले चर्चा के दौरान विपक्षी कांग्रेस विधायक भरत चंद्र नारा ने कहा कि असम सरकार ने दिसंबर तक नई शिक्षा नीति पर रिपोर्ट देने के लिए एक समिति का गठन किया था, जिसके बाद जनवरी तक खाका तैयार किया जाना था, लेकिन अभी रिपोर्ट देनी है। साथ ही कहा कि कई राज्यों ने पहले ही काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि असम में शिक्षा विभाग को पिछले छह सालों में राज्य के बजट का सबसे अधिक आवंटन प्राप्त हो रहा है, लेकिन ये उस अनुपात में प्रदर्शन करने में सक्षम नहीं है।