गुवाहाटी। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद बुधवार को पश्चिमी असम के तामूलपुर में बोडो साहित्य सभा (बीएसएस) के 61वें वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने और इसे संबोधित करने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे। राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ मंगलवार को गुवाहाटी पहुंचे। राष्ट्रपति के साथ असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अन्य गणमान्य व्यक्ति बीएसएस के मेगा कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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गुरुवार को वह मिजोरम विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करने आइजोल पहुंचेंगे। पूर्वोत्तर क्षेत्र में, जहां आदिवासी और गैर-आदिवासी रहते हैं, 200 से अधिक बोलियां बोली जाती हैं। बीएसएस का तीन दिवसीय सम्मेलन सोमवार से शुरू हो गया था। असम सरकार ने राज्य सरकार के उन कर्मचारियों के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया है जो भूटान और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के तामुलपुर के कचुबरी में हो रहे सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

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बीएसएस के अध्यक्ष टोरेन सी. बोरो ने कहा कि अब तक दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया है। असम के अलावा, बोडो भाषा बोलने वाले लोग बांग्लादेश, नेपाल, त्रिपुरा, नागालैंड और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में रहते हैं। असम साहित्य सभा से प्रेरित होकर 1952 में साहित्य, संस्कृति और भाषा के विकास के लिए बीएसएस का गठन किया गया था। यह विभिन्न जातीय समूहों के बीच समन्वय बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

बोडो (या बोरोस) कभी पूर्वोत्तर में एक शक्तिशाली और प्रभावशाली जाति या वंश था। जनवरी 2020 में केंद्र, असम सरकार और चार बोडो उग्रवादी संगठनों के बीच बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद असम सरकार ने 2020 में बोडो भाषा को राज्य की सहयोगी आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी। 2011 की जनगणना के अनुसार, असम में राज्य की कुल आबादी के लगभग 14.16 लाख बोडो भाषी (4.53 प्रतिशत) नागरिक हैं।